Monthly Archives: January 2017

कृषि की पढ़ाई स्नातकोत्तर स्तर पर वैकल्पिक रूप में हिन्दी माध्यम में कराए जाने का सुझाव।

प्रतिष्ठा में,
श्री राधा मोहन सिंह जी,
माननीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, भारत सरकार
कृषि भवन, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मार्ग, नई दिल्ली-110001

विषय :- कृषि की पढ़ाई स्नातकोत्तर स्तर पर वैकल्पिक रूप में हिन्दी माध्यम में कराए जाने का सुझाव।

महोदय,
निवेदन है कि हिन्दुस्थान में गन्ने और अनाज की खेती लाखों वर्षों से हो रही है और किसानों ने हिन्दुस्थान की जनता को अन्न की कमी कभी नहीं होने दी । प्राचीनकाल में संस्कृत के माध्यम से ज्ञान कराया जाता था । संभवतः सन् 1857 तक भी देशी राज्यों में कृषि की शिक्षा और उपज बढ़ाने का ज्ञान हिन्दी में दिया जाता था । उसके बाद कृषि की पढ़ाई शायद 1900 ई० के बाद अंग्रेजी में शुरू हुई होगी । फलस्वरूप उपज में वृद्धि दर कम हो गई और किसान को अपने परंपरा से प्राप्त ज्ञान के बजाय अंग्रेजी में वह ज्ञान मिलने लगा जो हमारी धरती के अनुकूल नहीं था । अंग्रेजी माध्यम से पढ़े और पढ़ रहे वैज्ञानिक प्रायः (कुछ अपवाद होंगे) व्यवहार में खेती से दूर हो जाते हैं और किसानों को उनके ज्ञान का अपेक्षित लाभ नहीं मिलता ।
इसलिए यह शीघ्र वांछित है कि कृषि की पढ़ाई उच्चतम स्तर तक हिन्दीभाषी क्षेत्र में और महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब आदि में हिन्दी माध्यम में हो ।
इस संबंध में राष्ट्रपति जी के लगभग 25 वर्ष पुराना आदेश देखने की कृपा करें । इस संबंध में यह निवेदन है कि अपने स्तर से हिन्दीभाषी राज्यों के कृषि मंत्रियों को राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों में उच्चतम स्तर तक हिन्दी में कृषि शिक्षा देने की प्रेरणा देने का कष्ट करें । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने की कृपा करें ।

सादर,
भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

रानी पद्मावती का अपमान स्वीकार्य नहीं-हिन्दू महासभा

नई दिल्ली, 31 जनवरी 2017

रानी पद्मावती का अपमान स्वीकार्य नहीं-हिन्दू महासभा

चित्तौड़ की रानी पद्मावती पर भंसाली प्रोडक्शन द्वारा फिल्माई जा रही फिल्म में राजपूत वीर रानी पद्मावती के चरित्र को गलत तरीके से दिखाए जाने के प्रयास को अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री मुन्ना कुमार शर्मा ने गम्भीरता से लेते हुए चेतावनी दी है कि यदि इस फिल्म का निर्माण व प्रदर्शन हुआ तो इसके गम्भीर परिणाम होंगे। उन्होंने चेताया है कि इतिहास के नाम पर धंधा करने वाले कुछ विदेशी व वामपंथी तथा-कथित इतिहासकारों के कुकृत्यों की आड़ में राजस्थान की गौरवशाली राजपूत परम्परा का अपमान कदापि बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
रानी पद्मावती को अमर वीरांगना बताते हुए उन्होंने अपने बयान में कहा है कि मुस्लिम शासन अलाउद्दीन खिलजी से अपने शील की रक्षा करते हुए उन्होंने स्वयं को जलती चिता में झोंक दिया। किन्तु उस दुष्ट के हाथ न आ सकी। चंद पैसों के लालच और ओछी पब्लिसिटी की चाह में ऐसी महान महिला को बड़े ही घटिया तरीके से अलाउद्दीन की प्रेमिका बताया जाना न सिर्फ भारतीय इतिहास के साथ अन्याय होगा बल्कि हर भारतीय नारी के सम्मान को भी ठेस पहुंचाएगा।
एक रानी जिसने उस अत्याचारी मुस्लिम शासक की छाया भी अपने ऊपर ना पड़ने दी हो वह उस दुष्ट की प्रेमिका कैसे हो सकती है? उन्होंने चेताया कि क्या अभिव्यक्ति की आजादी और कला के नाम पर कोई हिन्दू वीरांगनाओं का अपनी ही धरती पर चीर हरण करता रहे और हम मौन रहें, अब यह नहीं होगा। फिल्म के निर्माता संजय लीला भंसाली को अविलम्ब इस मामले में देश की महिलाओं व राष्ट्रभक्त समाज से माफी मांग इस प्रकार के किसी भी फिल्मांकन पर अविलम्ब विराम लगाना चाहिए अन्यथा देश की वीरांगनाओं के सम्मान की रक्षार्थ समस्त राष्ट्रभक्त हिन्दू समाज के साथ हिन्दू महासभा इस अपमान को जन जन तक ले जाएगी।
हिन्दू महासभा महासचिव मुन्ना कुमार शर्मा ने पत्र लिखकर फिल्मकार संजय लीला भंसाली को चेतावनी दी है कि यदि फिल्म रानी पद्मावती के निर्माण और फिल्मांकन को तत्काल रोका नहीं गया तो समस्त राष्ट्रभक्त हिन्दू समाज तीव्र विरोध करेगा। उन्होंने पत्र द्वारा कहा है कि हिन्दू महासभा इस फिल्म का निर्माण व फिल्मांकन नहीं होने देगी।

भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा)
राष्ट्रीय महासचिव
फोन :09312177979

मदर डेयरी के उत्पादों पर विवरण हिन्दी में न होना ।

सेवा में,
श्री राधा मोहन सिंह जी,
माननीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, भारत सरकार
कृषि भवन, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मार्ग, नई दिल्ली-110001

विषय :- मदर डेयरी के उत्पादों पर विवरण हिन्दी में न होना ।

महोदय,
कुछ वर्ष पहले तक जब मदर डेयरी पूरा भारत सरकार का उपक्रम था, तब इसके उत्पादों पर और डिपुओं पर उत्पाद का विवरण हिन्दी में भी होता था और हिन्दी में विवरण बड़ा और स्पष्ट होता था, किंतु जब से मदर डेयरी में भारत सरकार की आर्थिक सहभागिता कुछ कम हो गई है, तब से मदर डेयरी के प्रबंधकों ने हिन्दी को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है, जैसे मदर डेयरी के उत्पाद सिर्फ अंग्रेजी पढ़े-लिखों के लिए ही हों । अब किसी भी उत्पाद पर कोई विवरण हिन्दी में कदाचित ही होगा । कदाचित मिष्टी दोई और दूध के पैकेटों पर हिन्दी में विवरण होगा, किंतु आइसक्रीम के पैकेटों और रैपरों पर कोई विवरण हिन्दी में नहीं होता । मदर डेयरी के डिपुओं पर भी विवरण केवल अंग्रेजी में होता है । यह संघ की राजभाषा हिन्दी की उपेक्षा है और अपमानजनक भी है ।
निवेदन है कि भारत सरकार के आदेशों के अनुसार सब विवरण सब जगह हिन्दी में अंग्रेजी के ऊपर या अंग्रेजी से पहले (अंग्रेजी से छोटे या घटिया अक्षरों में नहीं) दिए जाना आवश्यक है । अतः निवेदन है कि तदनुसार आदेश देने की कृपा करें । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

फिल्म रानी पद्मावती के निर्माण व फिल्मांकन को तुरन्त रोकने की मांग।

प्रति,
श्री संजय लीला भंसाली
निर्माता /निर्देशक
भंसाली प्रोडक्शन, मुंबई।

विषय :- फिल्म रानी पद्मावती के निर्माण व फिल्मांकन को तुरन्त रोकने की मांग।

आपको ज्ञात है कि चिŸाड़ की रानी पद्मावती एक वीर, साहसी, पराक्रमी वीरांगना थीं। उन्होंने राजपूत समाज व हिन्दू समाज की इज्जत के लिये 16000 महिलाओं के साथ जौहर किया था। यह एक ऐतिहासिक तथ्य है, जिसे आप झुठला नहीं सकते हैं। रानी पद्मावती का किरदार कोई काल्पनिक तथ्यों पर आधारित नहीं है। यह कथानक ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है। आपकी जवाबदेही बनती है कि इस ऐतिहासिक तथ्य के साथ कोई छेड़-छाड़ नहीं करें। आप अनुभवी निर्माता-निर्देशक हैं। इसलिये ऐसा संभव नहीं है कि आप इस विषय में अनजान हों। आपने जान-बूझकर इस फिल्म की टीआरपी बढ़ाने के लिये रानी पद्मावती को हिन्दू विरोधी अलाऊद्दीन खिलजी की प्रेमिका दिखाया है। यह रानी पद्मावती, संपूर्ण राजपूत व हिन्दू समाज का अपमान है। भारत के 100 करोड़ हिन्दू इस अपमान को बर्दाशत नहीं करेंगे।
आपसे मांग है कि ‘रानी पद्मावती ‘ फिल्म के निर्माण व फिल्मांकन कार्य को तुरन्त बंद कर दें। अखिल भारत हिन्दू महासभा इस फिल्म का न तो निर्माण होने देगी और न ही फिल्मांकन करने देगी। साथ-ही आपको भारत वर्ष के 100 करोड़ हिन्दुओं का कोपभाजन भी बनना पडे़गा।

धन्यवाद सहित,
भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा)
राष्ट्रीय महासचिव
फोनः 09312177979

किसान कॉल सेंटर का नाम हिन्दी में रखे जाने का सुझाव ।

सेवा में,
श्री राधा मोहन सिंह जी,
माननीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, भारत सरकार
कृषि भवन, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मार्ग, नई दिल्ली-110001

विषय :- किसान कॉल सेंटर का नाम हिन्दी में रखे जाने का सुझाव ।

महोदय,
निवेदन है कि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से किसानों की सेवा और मार्गदर्शन के लिए किसान कॉल सेंटर बनाए गए हैं । कॉल सेंटर का नाम हमारे देश में विदेशी कम्पनियों के द्वारा संचालित उन उपकार्यालयों के लिए रखा गया है, जो उनके ग्राहकों को जानकारी देने और उत्पादों के आदेश लेने के लिए बने हैं, इसलिए कॉल सेंटर नाम उचित प्रतीत नहीं होता । वैसे भी भारत सरकार के आदेशों के अनुसार सरकारी संस्थाओं, कार्यालयों, प्रतिष्ठानों, उत्पादों और प्रकल्पों के नाम हिन्दी में/भारतीय होने चाहिए । इस प्रसंग में हमारे निम्नलिखित सुझाव हैं, जिनमें से कोई एक नाम कॉल सेंटर के लिए चुना जा सकता है :-
1. किसान कल्याण केंद्र (किसान कल्याण मंत्रालय है, इसलिए यह नाम सर्वथा उचित रहेगा)
2. किसान सेवा केंद्र
3. किसान परामर्श केंद्र
4. किसान मार्गदर्शन केंद्र
5. किसान पुकार केंद्र
6. किसान पूछताछ केंद्र
7. किसान पूछ-पृच्छ केंद्र आदि ।
विश्वास है कि नाम बदलने के आदेश देने की कृपा करेंगे । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

कृषि संबंधी नए उत्पादों और बीजों आदि के नाम हिन्दी में/भारतीय रखे जाने का सुझाव ।

प्रतिष्ठा में,
श्री राधा मोहन सिंह जी,
माननीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, भारत सरकार
कृषि भवन, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मार्ग, नई दिल्ली-110001

विषय :- कृषि संबंधी नए उत्पादों और बीजों आदि के नाम हिन्दी में/भारतीय रखे जाने का सुझाव ।

महोदय,
निवेदन है कि भारत सरकार के आदेशों के अनुसार सरकारी प्रतिष्ठानों, संस्थाओं, परियोजनाओं, प्रकल्पों आदि के नाम हिन्दी में/भारतीय होने आवश्यक हैं, इसीलिए भारतीय संचार निगम, महानगर टेलीफोन निगम, आर्यभट, खांदेरी पनडुब्बी, विक्रांत युद्धपोत, अग्नि, आकाश जैसे नाम रखे गए ।
कृषि उत्पादों के नाम भी अनेक हिन्दी में/भारतीय हैं, तथापि कुछ नाम अंग्रेजी में भी रखे गए हैं । सुझाव है कि कृषि वैज्ञानिक अनुसंधानशालाओं के वैज्ञानिकों को आदेश दिए जाएँ कि अनुसंधानों से निकल रहे नए उत्पादों, बीजों के नाम हिन्दी में/भारतीय रखे जाएँ । कुछ देशी नाम अन्य भारतीय भाषाओँ से भी लिए जा सकते हैं । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,
भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा) संपादक
(वीरेश त्यागी) प्रबंध संपादक

Felicitations for taking oath as 45th U.S. President.

His Excellency Mr. Donald Trump
President
United states of America.

Respected MR. Donald Trump,

Sub: felicitations for taking oath as 45th U.S. President.

We, office bearers of All India Hindu Mahasabha, New Delhi, India wish to congratulate you heartily as you taking oath as 45 th President of U.S.A.
We feel elated and look forward to forging a very close association with your government to ensure peace, prosperity, friendship and stronger business, cultural and secure relationship. We are extremely confident that we shall, under your able presidentship, seek and indeed have a secure world, where terrorism particularly Islamic fundamentalism and terrorism will be eliminated. We are willing to play whatever role or support you expected from us.
We will feel proud to contribute in any manner expected from us. Whenever to welcome you and ensure the close links of our democracies use to show a new path to the world. We feel, under your leadership America would be able to come closer to India and Hindus worldwide.
We will appreciate hearing from you.
Wishing you all the best.

(MUNNA KUMAR SHARMA) National General Secretary
(VIRESH TYAGI) National office Secretary

इंडिया गेट युद्ध स्मारक से अंग्रेज सैनिकों का नाम हटाने, भारतीय सैनिकों व स्वंतत्रता सेनानियों का नाम लिखने और छतरी के अंदर वीर सावरकर की प्रतिमा लगाने की मांग।

प्रतिष्ठा में,
श्री नरेन्द्र मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार।
साउथ ब्लॉक, राइसिना हिल,
नई दिल्ली-110011

विषय :-इंडिया गेट युद्ध स्मारक से अंग्रेज सैनिकों का नाम हटाने, भारतीय सैनिकों व स्वंतत्रता सेनानियों का नाम लिखने और छतरी के अंदर वीर सावरकर की प्रतिमा लगाने की मांग।

महोदय,
आपको ज्ञात हो कि इंडिया गेट भारतीय युद्ध स्मारक नहीं है। क्योंकि इस गेट पर अंग्रेज सैनिकों के नाम लिखें हैं, जिसने भारतीय स्वंतत्रता सेनानियां को यातनाएं दी थीं। इस पर न ही स्वतंत्रता संग्राम में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले स्वंतत्रता सैनानियों के नाम हैं और न ही स्वतंत्र भारत की रक्षा के लिये शहीद होने वाले सैनिकों के नाम हैं। यह युद्ध स्मारक गुलामी का प्रतीक है, जिसे तुरन्त बदलने की आवश्यकता है।
आपसे मांग है कि भारतीय स्वतंत्रता के लिये शहीद होने वाले, क्रांतिकारियों व स्वंतत्रता सैनानियों को सम्मान देने व स्वतंत्र भारत की रक्षा के लिये शहीद होने वाले सैनिकों को सम्मान देने के लिये निम्नलिखित निर्णय तुरन्त लेने की कृपा करेंः-
1. इंडिया गेट पर लिखे हुए अंग्रेज सैनिकों का नाम हटाकर उसकी जगह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं स्वतंत्र भारत के लिये शहीद होने वाले भारतीय सैनिकों का नाम लिखा जाये।
2. अखिल भारतीय युद्ध एवं स्वतंत्रता सेनानी स्मारक शीघ्र स्थापित किया जाये।
3. इंडिया गेट के पास लगी छतरी (जिसमें जार्ज पंचम की प्रतिमा थी) के मध्य महान स्वंतत्रता सेनानी व क्रांतिकारियों के प्रेरणाश्रोत स्वातंत्र्य वीर सावरकर की प्रतिभा स्थापित की जाये।
4. जिस प्रकार रेसकोर्स मार्ग का नाम लोक कल्याणा मार्ग रखा गया है, उसी प्रकार राजपथ का नाम बदलकर ‘लोकपथ‘ रखा जाये।

सादर,
भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
फोनः 9312177979

बच्चों पर अंग्रेजी नहीं लादने की मांग।

प्रतिष्ठा में,
श्री नरेन्द्र मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार।
साउथ ब्लॉक, राइसिना हिल,
नई दिल्ली-110011

विषय :- बच्चों पर अंग्रेजी नहीं लादने की मांग।

महोदय,

कृपया निम्नलिखित तथ्यों का संज्ञान लेने का कष्ट करेंः-
1.ज्ञात हुआ है कि आपने 12 सचिवों की एक समिति बनाई, यह तय करने के लिए कि देश के करोड़ों बच्चों की शिक्षा का माध्यम क्या हो और उन्हें कौन-सी भाषा पढ़ाई जाए । हमारे सरकारी अफसर सरकार का बेड़ा गर्क करने पर उतारू हैं, क्योंकि इन 12 रत्नों (सचिवों) के अनुसार छठी कक्षा से आगे तक सभी कक्षाओं में अंग्रेजी की पढ़ाई अनिवार्य होनी चाहिए और देश के 6,612 खण्डों (ब्लॉकों) में सरकार को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की स्थापना करनी चाहिए ।
2. शिक्षा में भाषा नीति बनाने के लिए अफसरों के बजाय शिक्षाविदों और भाषाविदों की समिति बनाई जानी चाहिए ।
3. देश में हर साल करोड़ों बच्चे अंग्रेजी की जबर्दस्त पढ़ाई के कारण स्कूल छोड़ देते हैं और सबसे ज्यादा बच्चे अंग्रेजी में फेल होते हैं, अंग्रेजी रटने के कारण अन्य विषयों की उपेक्षा होती है और छात्रों की मौलिकता नष्ट होती है, वे नकलची बन जाते हैं, स्वभाषा और स्वदेश प्रेम में गिरावट आती है ।
आपसे अनुरोध है कि अंग्रेजी पढ़ाने की अनिवार्यता न करें, बल्कि इसे वैकल्पिक रखें। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति जी का 4 नवंबर, 1991 के आदेश के अनुसार देश में सभी जगह विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में विभिन्न विषयों की पढ़ाई हिन्दी में भी करने के लिए उपयुक्त व्यवस्था उपलब्ध कराने का आदेश है, जिसे अब 25 वर्ष हो गए हैं । यह स्वाभाविक है कि अंग्रेजी भाषा को अनिवार्यतः थोपने से राष्ट्रपति जी के और भारत सरकार के अब तक के संघ की राजभाषा हिन्दी को लागू करने के आदेश निरर्थक हो जाएँगें । यह भी कहना आवश्यक है कि इन आदेशों के पालन हेतु कोई उल्लेखनीय ठोस कार्रवाई नहीं हुई दिखाई पड़ती है । इन्हीं आदेशों के अनुसार हिन्दी माध्यम से कृषि, प्रौद्योगिकी और आयुर्विज्ञान की पढ़ाई की व्यवस्था के आदेश दिए गए हैं ।
विश्वास है कि अविलंब वांछित आदेश देने की कृपा करेंगे ।

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री