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बालवीर हकीकत राय बलिदान दिवस समारोह का भव्य आयोजन, बाल प्रतिभा खोज प्रतियोगिता संपन्न, हिन्दुत्व के लिये उल्लेखनीय कार्य करनेवाली विभूतियां सम्मानित

नई दिल्ली, 01 फरवरी 2017

बालवीर हकीकत राय बलिदान दिवस समारोह का भव्य आयोजन, बाल प्रतिभा खोज प्रतियोगिता संपन्न, हिन्दुत्व के लिये उल्लेखनीय कार्य करनेवाली विभूतियां सम्मानित
बसंत पचमी के दिन अखिल भारत हिन्दू महासभा, दिल्ली प्रदेश के तत्वावधान में पार्टी मुख्यालय हिन्दू महासभा भवन, मंदिर मार्ग, नई दिल्ली में हिन्दू धर्म की रक्षा के लिये बलिदान होने वाले बालवीर हकीकत राय का बलिदान दिवस समारोह पूरी भव्यता के साथ आयोजित की गई। सर्वप्रथम मां सरस्वती की पूजा व हवन किया गया। तत्पश्चात हिन्दू महासभा भवन स्थित बालवीर हकीकत राय, स्वातंत्र्य वीर सावरकर एवं भाई परमानन्द की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया तथा श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। तत्पश्चात बालवीर हकीकत राय व बलिदान दिवस समारोह की शुरूआत हुई। अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्रप्रकाश कौशिक व राष्ट्रीय महांमत्री मुन्ना कुमार शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। मंच संचालन राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री वीरेश त्यागी ने किया। दिल्ली प्रदेशाध्यक्ष सुनील कुमार ने गुलदस्ता भेंटकर समारोह की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्रप्रकाश कौशिक व समारोह के विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय महामंत्री मुन्ना कुमार शर्मा का स्वागत किया। अपने संबोधन में राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्रप्रकाश कौशिक ने सभी उपस्थित जनों को समारोह की शुभकामनाएं दीं तथा कहा कि हमें बालवीर हकीकत राय के त्याग, बलिदान व साहस से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने प्राण त्याग दिये, परन्तु हिन्दू धर्म का त्याग करना स्वीकार नहीं किया। समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय महामंत्री मुन्ना कुमार शर्मा ने कहा कि वीर हकीकत राय ने त्याग व बलिदान के माध्यम से राष्ट्र एवं हिन्दू समाज के सामने एक आदर्श, प्रस्तुत किया है। उन्होंने हमें सिखाया है कि हमें हिन्दुत्व के मार्ग से कभी भी अलग नहीं होना चहिए। उनका मानना था कि हिन्दू धर्म दुनिया का सर्वश्रेष्ठ धर्म है, हमें अपने धर्म पर गर्व करना चाहिए। उन्होंने हिन्दुस्तान के निवासियों का आहवान किया कि हमें अखंड हिन्दू राष्ट्र का निर्माण करना है तथा हिन्दू, हिन्दी, हिन्दुस्तान का विकास करना है।

अखिल भारत हिन्दू महासभा वीर हकीकत राय के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिये मृतसंकल्य है। राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री वीरेश त्यागी ने सभी अतिथियों व उपस्थितजनों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हम हिन्दू रक्षा व राष्ट्र रक्षा का संकल्प लें।
बाल प्रतिभा खोज प्रतियोगित में श्रीनिवास संस्कृत विद्यापीठम, भाई परमानन्द शिक्षा निकेतन, बेबी पब्लिक स्कूल, भंगेल, सैनिक माडल स्कूल, युवा शाक्ति माडल स्कूल, बेबी पब्लिक स्कूल, गेझा, न्यू एज पब्लिक स्कूल सहित दिल्ली -एनसीआर के दो दर्जन विद्यालयों के बच्चे सम्मिलित हुए। बच्चों ने गायन, वादन, नृत्य आदि के माध्यम से कला का प्रदर्शन किया। उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले बच्चों को मेडल देकर पुरस्कृत किया गया। समारोह में बंसत राव पाटील, पं0 अशोक शर्मा, योगेन्द्र वर्मा, मोहन लाल वर्मा, प्रवीन त्यागी, धर्मपाल सिवाच, महेन्द्र भाई परमार, सीपी शर्मा, भुवन सोनवाल, चन्द्रहास फेरन, बीजू कुमार, लीला शाक्या, प्रताप सूर्यवंशी, ईश्वर विल्होरे, अनिलकांत भटनागर, मोहन कारेमोरे, महेश कुलकर्णी, राजेन्द्र पटेल, ईश्वर गुप्ता, सुरेन्द्र गर्ग, डा. दीपक त्यागी, ललित भारद्वाज, अनिल पवार, डॉ. जर्नादन उपाध्याय, के. राजेशखर, कन्हैया लाल रायकबार, सुब्रहमण्यम पोट्टी, जगदीश प्रसाद मिश्रा, पूजा शकुन पांडेय, उमेश त्यागी, शिवा शुक्ला, शिवनाथ शर्मा, दीपेन्द्र सिंह, अर्जुन सिंह, विनोद दूबे, सत्यनारायण मिश्रा, विजय मिश्रा सहित, सैकडों हिन्दू महासभा पदाधिकारी, कार्यकर्ता, समाजसेवी व गणमान्य लोग सम्मिलित हुए।

भवदीय

(वीरेश त्यागी)
राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

कृषि की पढ़ाई स्नातकोत्तर स्तर पर वैकल्पिक रूप में हिन्दी माध्यम में कराए जाने का सुझाव।

प्रतिष्ठा में,
श्री राधा मोहन सिंह जी,
माननीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, भारत सरकार
कृषि भवन, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मार्ग, नई दिल्ली-110001

विषय :- कृषि की पढ़ाई स्नातकोत्तर स्तर पर वैकल्पिक रूप में हिन्दी माध्यम में कराए जाने का सुझाव।

महोदय,
निवेदन है कि हिन्दुस्थान में गन्ने और अनाज की खेती लाखों वर्षों से हो रही है और किसानों ने हिन्दुस्थान की जनता को अन्न की कमी कभी नहीं होने दी । प्राचीनकाल में संस्कृत के माध्यम से ज्ञान कराया जाता था । संभवतः सन् 1857 तक भी देशी राज्यों में कृषि की शिक्षा और उपज बढ़ाने का ज्ञान हिन्दी में दिया जाता था । उसके बाद कृषि की पढ़ाई शायद 1900 ई० के बाद अंग्रेजी में शुरू हुई होगी । फलस्वरूप उपज में वृद्धि दर कम हो गई और किसान को अपने परंपरा से प्राप्त ज्ञान के बजाय अंग्रेजी में वह ज्ञान मिलने लगा जो हमारी धरती के अनुकूल नहीं था । अंग्रेजी माध्यम से पढ़े और पढ़ रहे वैज्ञानिक प्रायः (कुछ अपवाद होंगे) व्यवहार में खेती से दूर हो जाते हैं और किसानों को उनके ज्ञान का अपेक्षित लाभ नहीं मिलता ।
इसलिए यह शीघ्र वांछित है कि कृषि की पढ़ाई उच्चतम स्तर तक हिन्दीभाषी क्षेत्र में और महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब आदि में हिन्दी माध्यम में हो ।
इस संबंध में राष्ट्रपति जी के लगभग 25 वर्ष पुराना आदेश देखने की कृपा करें । इस संबंध में यह निवेदन है कि अपने स्तर से हिन्दीभाषी राज्यों के कृषि मंत्रियों को राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों में उच्चतम स्तर तक हिन्दी में कृषि शिक्षा देने की प्रेरणा देने का कष्ट करें । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने की कृपा करें ।

सादर,
भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव

(वीरेश त्यागी)  राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री