Monthly Archives: March 2017

नागालैंड में उग्रवादियों को सरकारी फंडिंग ।

प्रतिष्ठा में,
श्री राजनाथ सिंह जी,
माननीय गृह मंत्री, भारत सरकार
नॉर्थ ब्लॉक, नई दिल्ली-110001

विषय :- नागालैंड में उग्रवादियों को सरकारी फंडिंग ।

महोदय,

समाचार पत्रों से निम्नलिखित जानकारियाँ मिली हैं –
1. नागालैंड सरकार के विभाग, आम लोगों से गैरकानूनी टैक्स, उग्रवादियों के लिए वसूल रहे हैं ।
2. उक्त वसूली से प्राप्त धन एनएससीएन (खापलांग) को, जो प्रतिबंधित है, दिया जा रहा है ।
3. धनराशि अन्य उग्रवादी संगठनों को भी दी जा रही है ।
4. असम राइफल्स ने एनएससीएन (खापलांग) के वित्त विभाग के प्रमुख खेटोशे सुमी को गिरफ्तार किया ।

इस संबंध में निवेदन है कि –
1. सुमी की गिरफ्तारी काफी नहीं है, अन्य अनेक अपराधी पकड़े जाकर शीघ्र दंडित होने चाहिए ।
2. सरकारी विभागों के दोषी अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जानी आवश्यक है । जिन्हें गिरफ्तार होना चाहिए, वे गिरफ्तार अवश्य किए जाएँ ।
3. दोषी मंत्रियों आदि पर भी आपराधिक कार्रवाई शीघ्र होनी आवश्यक है ।

इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

(1) संविधान के अनुच्छेद 348 (2) के अनुसार उच्च न्यायालयों में हिंदी तथा प्रादेशिक राजभाषाओं में कार्यवाही, निर्णय आदि संपादित करने का तथा विकल्प दिए जाने हेतु तथा (3) संविधान के अनुच्छेद 348 में संशोधन तथा कर उच्चतम न्यायालय में सभी कार्यवाहियाँ व निर्णय आदि में देश की तथा राजभाषा हिंदी में भी संपादित करने का विकल्प दिए जाने हेतु।

प्रतिष्ठा में,
श्री रवि शंकर प्रसाद जी,
माननीय विधि एवं न्याय मंत्री, भारत सरकार
शास्त्री भवन, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मार्ग, नई दिल्ली-110001

विषय :- (1) संविधान के अनुच्छेद 348
(2) के अनुसार उच्च न्यायालयों में हिंदी तथा प्रादेशिक राजभाषाओं में कार्यवाही, निर्णय आदि संपादित करने का तथा विकल्प दिए जाने हेतु तथा
(3) संविधान के अनुच्छेद 348 में संशोधन तथा कर उच्चतम न्यायालय में सभी कार्यवाहियाँ व
निर्णय आदि में देश की तथा राजभाषा हिंदी में भी संपादित करने का विकल्प दिए जाने हेतु।

महोदय,

निवेदन है कि दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा आदि हिंदी भाषी राज्यों में उच्च न्यायालयों में जहाँ हिंदी में निर्णय और आदेश देने की छूट नहीं है, वहाँ राज्य सरकारों के साथ तालमेल करके हिंदी को उच्च न्यायालय की वैकल्पिक भाषा बनाए जाने के संबंध में जनहित में शीघ्र कार्रवाई कराने की कृपा करें ।
राष्ट्रपति जी के 27 अप्रैल, 1960 के आदेश के आलोक में और अब लगभग 2 दशक पहले के राष्ट्रपति जी के आदेशों के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय में भी, यदि आवश्यक हो तो संविधान में संशोधन करके हिंदी को उच्चतम न्यायालय की वैकल्पिक भाषा बनाने के संबंध में शीघ्र कार्रवाई करने की कृपा करें । वैकल्पिक भाषा बनाने के संबंध में शीघ्र कार्रवाई करने की कृपा करें । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,
भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा) संपादक
(वीरेश त्यागी) प्रबंध संपादक

स्टैंडर्ड जर्नल्स में अंग्रेजी में रिसर्च पेपर पब्लिश होने पर ही मिलेगा शिक्षकों को प्रमोशन।

प्रतिष्ठा में,
श्री प्रकाश जावडे़कर जी,
माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री, भारत सरकार
शास्त्री भवन, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद मार्ग, नई दिल्ली-110001

विषय :- स्टैंडर्ड जर्नल्स में अंग्रेजी में रिसर्च पेपर पब्लिश होने पर ही मिलेगा शिक्षकों को प्रमोशन।

महोदय,

ग्वालियर से प्रकाशित समाचार पत्र दैनिक भास्कर में छपे समाचार से यह निष्कर्ष निकल रहा है कि हिंदी माध्यम में काम करने वाले कॉलेज और विश्वविद्यालयों के आचार्यगण और शोधार्थियों को प्रोन्नति पाने में कठिनाई आएगी, क्योंकि स्थानीय शोध पत्रिकाओं में शोध पत्र प्रकाशित होने पर शोध पत्र के अंक नहीं मिलेंगे ।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 38,653 पत्रिकाओं/जर्नलों की सूची भेजी है, जिनमें संभवतः हिंदी में प्रकाशित स्वदेशी जर्नल नहीं हैं, क्योंकि आयोग ने उन्हें स्तरीय नहीं माना है ।
इस संदर्भ में निवेदन है कि –
1. वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् सहित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के तकनीकी/वैज्ञानिक जर्नल/पत्रिकाएँ हिंदी में प्रकाशित होती हैं
2. इस समाचार में हिंदी में प्रकाशित शोध पत्रों पर प्रोन्नति न होने की सूचना की तत्काल जाँच होनी आवश्यक है, क्योंकि यह भेदभावपूर्ण है और अपनी भाषाओँ के प्रति दुर्भावनापूर्ण भी है, अर्थात् उन्हें हीनता की श्रेणी में ला दिया गया है ।
3. गृह मंत्रालय, भारत सरकार के आदेश हैं कि हिंदी में प्रकाशित शोध पत्रों को प्रोन्नति के समय प्राप्तांकों में जोड़ा जाए और उन्हें कम वेटेज न दिया जाए, इसलिए भी उक्त समाचार से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्णय पर प्रश्न चिह्न लगता है ।

निवेदन है कि अविलंब कार्रवाई कराने की कृपा करें । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

चर्च ने बाल शोषण में भरा 1425 करोड़ का मुआवजा ।

प्रतिष्ठा में,
श्री राजनाथ सिंह जी,
माननीय गृह मंत्री, भारत सरकार
नॉर्थ ब्लॉक, नई दिल्ली-110001

विषय :- चर्च ने बाल शोषण में भरा 1425 करोड़ का मुआवजा ।

महोदय,

ऑस्ट्रेलिया में कैथोलिक चर्च के पादरियों ने 35 वर्षों के दौरान 3066 बच्चों का यौन शोषण किया । हो सकता है कि यह आँकड़ा कम करके दिखाया गया हो और आँकड़ा इससे बड़ा हो तो भी हमारे देश में केरल में अनेक चर्च संस्थाओं के संबंध में इसी तरह के समाचार विगत कुछ दशकों में आए हैं, जिनके अनुसार बिहार, झारखण्ड आदि से बच्चों को आश्रम नाम के कथित बाल गृहों में रखा गया और शिक्षा के मुखौटे में उनका गंभीर यौन शोषण हुआ ।
इस संबंध में निवेदन है कि चर्च से संबंधित सोसाइटियों और आश्रमों की, जहाँ देश के अन्य भागों से बच्चे लाए जाते हैं, गुप्त जाँच कराई जाए और दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाए, साथ-साथ विदेशों से उन्हें मिल रहे विपुल धन को रोका जाए । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

एशिया के समीकरणों में नया मोड़ ।

प्रतिष्ठा में,
श्री नरेन्द्र मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली-110011

विषय :- एशिया के समीकरणों में नया मोड़ ।

महोदया

निम्नलिखित तथ्यों पर प्रकाश डालने की कृपा करेंः-
1. लंबी दूरी के प्रक्षेपास्त्रों अग्नि-4 और अग्नि-5 के परीक्षणों से विचलित होकर चीन पाकिस्तान के प्रक्षेपास्त्र कार्यक्रम को मदद देने को व्यग्र है ।
2. चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा गुलाम कश्मीर से होकर गुजर रहा है, इस प्रकार चीन गुलाम कश्मीर को पाकिस्तान का भाग बनाने में जुटा है
3. आपके नेतृत्व वाली केन्द्रीय सरकार तिब्बत नीति में मौलिक परिवर्तन लाने का निर्णय कर रही है ।
4. तिब्बती जनता के हितों की अनदेखी करके चीन को खुश करना हिंदुस्थान के लिए लाभकारी नहीं रहा ।
5. अमेरिका के नए राष्ट्रपति श्री ट्रम्प का चीन के प्रति विरोधी रुख है ।

इस प्रसंग में निवेदन है कि –
1. तिब्बत पर चीन का आधिपत्य स्वीकारने में हुई गलती का सुधारा जाए और तिब्बत को स्वतंत्र देश होने की मान्यता पर विचार किया जाए ।
2. चीन से हिंदुस्थान में आने वाले घटिया माल को रोका जाए, जिससे चीन की अर्थव्यवस्था को झटका लगे ।
3. ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन द्वारा बनाए जा रहे बांधों पर निरंतर निगरानी रखी जाए और विरोध को प्रखर किया जाए ।
4. चीन के व्यवहार से त्रस्त देशों के साथ संबंध गहरे किए जाएँ ।

इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

कर्मचारी राज्य बीमा निगम में राजभाषा नियमों की धज्जियाँ उड़ाया जाना और श्रमिकों को परेशान करना ।

प्रतिष्ठा में,
श्री बंडारू दत्तात्रेय जी,
माननीय श्रम एवं रोजगार मंत्री, भारत सरकार
श्रम शक्ति भवन, रफी अहमद किदवई मार्ग,
नई दिल्ली-110001

विषय :- कर्मचारी राज्य बीमा निगम में राजभाषा नियमों की धज्जियाँ उड़ाया जाना और श्रमिकों को परेशान करना ।

महोदय,

आपको ज्ञात हो कि कर्मचारी राज्य बीमा निगम का फार्म 1 (घोषणा प्रपत्र) और अस्थायी पहचान प्रमाण पत्र के फार्म विक्टोरिया काल की अंग्रेजी में उपलब्ध हैं ।
आपको ज्ञात हो कि राजभाषा नियमावली 1976 के नियम 11 के अनुसार सब फार्म हिंदी और अंग्रेजी में छपे होने/चक्रमुद्रित रूप में होने अनिवार्य हैं, जिनमें हिंदी ऊपर अथवा पहले होनी चाहिए । यह भी सब जानते हैं कि कर्मचारी राज्य बीमा निगम का मुख्य कार्य श्रमिकों और कम शिक्षित कर्मकारों से रहता है, जिनसे संबंधित कार्य हिंदी में (क और ख खेत्रों में) होना चाहिए। तथापि फार्म तक हिंदी में नहीं है और अंग्रेजी में देकर इनके द्वारा अंग्रेजी थोपने का पूरा प्रयत्न हो रहा है ।
निवेदन है कि इस विषय की जाँच गहराई से कराई जाए और गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग के दिनांक-22 अगस्त, 1989 के आदेश के अनुसार राजभाषा नियमों के उल्लंघन के विरुद्ध अनुशासन की कार्रवाई कराने के आदेश देने की कृपा करें । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

हाई कोर्ट में हिंदी, क्षेत्रीय भाषाओँ में काम कराने की मांग।

प्रतिष्ठा में,
श्री रवि शंकर प्रसाद जी,
माननीय विधि एवं न्याय मंत्री, भारत सरकार
शास्त्री भवन, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मार्ग, नई दिल्ली-110001

विषय :- हाई कोर्ट में हिंदी, क्षेत्रीय भाषाओँ में काम कराने की मांग।

महोदय,
निवेदन है कि संविधान के अनुच्छेद 348 में उच्च न्यायालयों में हिंदी और भारतीय भाषाओँ के प्रयोग का प्रावधान बिल्कुल स्पष्ट है । उसमें किसी उच्च न्यायालय अथवा उच्चतम न्यायालय से पूछताछ का कोई प्रावधान नहीं है । 21 मई, 1965 से शुरू हुई परामर्श की परंपरा न तो लोकहित में है और न ही भावी पीढ़ियों के हित में है । यह स्वाभाविक है कि जो न्यायाधीश और अधिवक्ता अंग्रेजी भाषा पर सवार होकर अन्य अनेक अंग्रेजी न जानने वालों अथवा कम अंग्रेजी जानने वालों को नचा सकते हैं, वे अंग्रेजी के साथ हिंदी का विकल्प सुलभ कराने में सहमत सरलता से नहीं होंगे । संविधान के प्रावधान को लागू हुए 67 वर्ष हो गए हैं और आगे जितना समय बीतेगा, अंग्रेजी की जकड़ मजबूत होती जाएगी । उस जकड़ को मजबूत करने में देश के हजारों कॉन्वेंट और पब्लिक स्कूल लगे हुए हैं, क्योंकि अंग्रेजी से उन्हें बेतुकी आमदनी हो रही है और राजनीतिबाजों की ढिलाई के कारण वे जनता को लूटने में सफल हो रहे हैं । इसलिए तत्परता से मंत्रालय की स्थायी समिति की संस्तुति पर कार्रवाई होनी चाहिए । यह भी उल्लेखनीय है कि संसदीय राजभाषा समिति की संस्तुतियों पर राष्ट्रपति जी ने आदेश दे रखे हैं, जो काफी पुराने हैं । इस संबंध में गृह मंत्रालय (राजभाषा विभाग) का दिनांक 13 जुलाई, 2005 का संकल्प संख्या 11011/5/2003-रा०भा० (अनु) देखने की कृपा करें और अविलंब उक्त संकल्प के बिंदु संख्या 16.8 पर विधायी विभाग से विर्मश करके तत्काल निर्णय लिया जाए । इसी विषय में गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग के दिनांक 24 नवंबर, 1998 के संकल्प संख्या 1/20012/4/92-रा० भा० (नी-1) को भी देखने की कृपा करें । उसकी संस्तुति संख्या 12 से 16 तक अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, जिन पर कार्रवाई प्रतीक्षा सूची में पड़ी हुई है । इससे पहले 27 अप्रैल, 1960 के राष्ट्रपति जी के आदेश में भी उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय में हिंदी के प्रयोग का कार्य आरंभ करने का आदेश है । विश्वास है कि शीघ्र जनहित में और देश की अधिकांश अंग्रेजी न जानने वाली जनता में स्वाधीनता की भावना की वृद्धि हेतु अनुकूल कार्रवाई की जाएगी । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

एक अफसाना भर नहीं पद्मावती ।

प्रतिष्ठा में,
श्री वेंकैया नायडू जी,
माननीय सूचना व प्रसारण मंत्री, भारत सरकार
निर्माण भवन, नई दिल्ली-110011

विषय :- एक अफसाना भर नहीं पद्मावती ।

महोदय,

रानी पद्मावती समेत हजारों महिलाओं ने जौहर कर लिया अर्थात् अग्निकुंड में कूद कर जीवनलीला समाप्त कर ली । अलाउद्दीन खिलजी जब किले के अंदर पहुँचा तो उसे राख ही मिली । राजपूताना के इतिहास की अनेक पुस्तकों में इस घटना का विवरण प्रायः इसी रूप में मिलता है कि अलाउद्दीन रानी पद्मावती को प्रत्यक्ष देख भी नहीं सका ।
अलाउद्दीन खिलजी क्रूर, चरित्रहीन तानाशाह था, जिसने अपनी हवस के कारण हजारों महिलाओं को जौहर करने पर विवश कर दिया । ऐसी स्थिति में अफसाना बनाकर महारानी पद्मावती का तिरस्कार सब प्रकार से निंदनीय है ।
इस प्रसंग में निवेदन है कि निर्माता संजय लीला भंसाली द्वारा निर्मित फिल्म रानी पद्मावती की पटकथा की शीघ्र जाँच कराई जाए ताकि इस ऐतिहासिक घटना का श्री भंसाली फिल्म का नाम बदलकर भी चित्रण न कर सकें ।

यह भी अनुरोध है कि फिल्म प्रमाणन बोर्ड को भी सक्रिय कर दिया जाए । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाने हेतु ।

प्रतिष्ठा में,
श्रीमती सुषमा स्वराज जी,
माननीया विदेश मंत्री, भारत सरकार
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली-110011

विषय :- हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाने हेतु ।

महोदय,

भोपाल में हुए विश्व हिंदी सम्मेलन में और उसके पहले के अनेक सम्मेलनों में संकल्प पारित होते रहे हैं कि हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा बनाया जाए । प्रायः देश के विदेश मंत्रियों ने सम्मेलनों में इस संकल्प के अनुसार हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाने हेतु गंभीर प्रयत्न करने के आश्वासन भी दिए । परंतु 40 वर्षों के दौरान, जबसे प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन नागपुर में हुआ था, गंभीर प्रयत्नों की कमी महसूस होती रही है । वर्तमान सरकार देशहित के मामलों में सक्रियता से आगे बढ़ रही है, इस पृष्ठभूमि में निवेदन है कि हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की 6 भाषाओँ के साथ 7वीं भाषा बनवाने हेतु आप अपनी ओर से पूरा-पूरा प्रयत्न करने की कृपा करें । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

मोरक्को में रातों-रात लगा बुरके पर प्रतिबंध ।

प्रतिष्ठा में,
श्री राजनाथ सिंह जी,
माननीय गृह मंत्री, भारत सरकार
नॉर्थ ब्लॉक, नई दिल्ली-110001

विषय :- मोरक्को में रातों-रात लगा बुरके पर प्रतिबंध ।

महोदय,

समाचार पत्रों से निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण सूचनाएं प्रकाश में आई हैं –
1. मोरक्को में सुरक्षा कारणों से बुरके के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है ।
2. हमलावरों ने बार-बार कई अपराधों को अंजाम देने के लिए इस पोशाक का उपयोग किया है ।
3. टारुडांट में व्यापारियों को 48 घंटों के अंदर अपना मौजूदा स्टॉक नष्ट करने के आदेश भी दिए गए हैं ।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार मोरक्को इस्लामी देश है । यह तथ्यपूर्ण है कि बुरका हिंदुस्थान में मुसलमान पुरुषों के अधीन माताओं और बहनों पर एक अमानवीय अत्याचार की तरह है, क्योंकि गर्मियों में बुरका पहनना कई प्रकार की व्याधियों का कारण बनता है और अपराधी तत्त्व निश्चित रूप से बुरके में महिलाओं से अपराध करवाते हैं ।
यह भी जानकारी मिली है कि तुर्की आदि मुस्लिम देशों में स्त्रियाँ बुरका नहीं ओढ़ती हैं ।
इस पृष्ठभूमि में शीघ्र विचार करें कि हिंदुस्थान में भी बुरके पर प्रतिबंध लगा दिया जाए । इससे मुस्लिम माताएं और बहनें संत्रास से मुक्त हो जाएंगी । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री