Daily Archives: March 9, 2017

हाई कोर्ट में हिंदी, क्षेत्रीय भाषाओँ में काम कराने की मांग।

प्रतिष्ठा में,
श्री रवि शंकर प्रसाद जी,
माननीय विधि एवं न्याय मंत्री, भारत सरकार
शास्त्री भवन, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मार्ग, नई दिल्ली-110001

विषय :- हाई कोर्ट में हिंदी, क्षेत्रीय भाषाओँ में काम कराने की मांग।

महोदय,
निवेदन है कि संविधान के अनुच्छेद 348 में उच्च न्यायालयों में हिंदी और भारतीय भाषाओँ के प्रयोग का प्रावधान बिल्कुल स्पष्ट है । उसमें किसी उच्च न्यायालय अथवा उच्चतम न्यायालय से पूछताछ का कोई प्रावधान नहीं है । 21 मई, 1965 से शुरू हुई परामर्श की परंपरा न तो लोकहित में है और न ही भावी पीढ़ियों के हित में है । यह स्वाभाविक है कि जो न्यायाधीश और अधिवक्ता अंग्रेजी भाषा पर सवार होकर अन्य अनेक अंग्रेजी न जानने वालों अथवा कम अंग्रेजी जानने वालों को नचा सकते हैं, वे अंग्रेजी के साथ हिंदी का विकल्प सुलभ कराने में सहमत सरलता से नहीं होंगे । संविधान के प्रावधान को लागू हुए 67 वर्ष हो गए हैं और आगे जितना समय बीतेगा, अंग्रेजी की जकड़ मजबूत होती जाएगी । उस जकड़ को मजबूत करने में देश के हजारों कॉन्वेंट और पब्लिक स्कूल लगे हुए हैं, क्योंकि अंग्रेजी से उन्हें बेतुकी आमदनी हो रही है और राजनीतिबाजों की ढिलाई के कारण वे जनता को लूटने में सफल हो रहे हैं । इसलिए तत्परता से मंत्रालय की स्थायी समिति की संस्तुति पर कार्रवाई होनी चाहिए । यह भी उल्लेखनीय है कि संसदीय राजभाषा समिति की संस्तुतियों पर राष्ट्रपति जी ने आदेश दे रखे हैं, जो काफी पुराने हैं । इस संबंध में गृह मंत्रालय (राजभाषा विभाग) का दिनांक 13 जुलाई, 2005 का संकल्प संख्या 11011/5/2003-रा०भा० (अनु) देखने की कृपा करें और अविलंब उक्त संकल्प के बिंदु संख्या 16.8 पर विधायी विभाग से विर्मश करके तत्काल निर्णय लिया जाए । इसी विषय में गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग के दिनांक 24 नवंबर, 1998 के संकल्प संख्या 1/20012/4/92-रा० भा० (नी-1) को भी देखने की कृपा करें । उसकी संस्तुति संख्या 12 से 16 तक अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, जिन पर कार्रवाई प्रतीक्षा सूची में पड़ी हुई है । इससे पहले 27 अप्रैल, 1960 के राष्ट्रपति जी के आदेश में भी उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय में हिंदी के प्रयोग का कार्य आरंभ करने का आदेश है । विश्वास है कि शीघ्र जनहित में और देश की अधिकांश अंग्रेजी न जानने वाली जनता में स्वाधीनता की भावना की वृद्धि हेतु अनुकूल कार्रवाई की जाएगी । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

एक अफसाना भर नहीं पद्मावती ।

प्रतिष्ठा में,
श्री वेंकैया नायडू जी,
माननीय सूचना व प्रसारण मंत्री, भारत सरकार
निर्माण भवन, नई दिल्ली-110011

विषय :- एक अफसाना भर नहीं पद्मावती ।

महोदय,

रानी पद्मावती समेत हजारों महिलाओं ने जौहर कर लिया अर्थात् अग्निकुंड में कूद कर जीवनलीला समाप्त कर ली । अलाउद्दीन खिलजी जब किले के अंदर पहुँचा तो उसे राख ही मिली । राजपूताना के इतिहास की अनेक पुस्तकों में इस घटना का विवरण प्रायः इसी रूप में मिलता है कि अलाउद्दीन रानी पद्मावती को प्रत्यक्ष देख भी नहीं सका ।
अलाउद्दीन खिलजी क्रूर, चरित्रहीन तानाशाह था, जिसने अपनी हवस के कारण हजारों महिलाओं को जौहर करने पर विवश कर दिया । ऐसी स्थिति में अफसाना बनाकर महारानी पद्मावती का तिरस्कार सब प्रकार से निंदनीय है ।
इस प्रसंग में निवेदन है कि निर्माता संजय लीला भंसाली द्वारा निर्मित फिल्म रानी पद्मावती की पटकथा की शीघ्र जाँच कराई जाए ताकि इस ऐतिहासिक घटना का श्री भंसाली फिल्म का नाम बदलकर भी चित्रण न कर सकें ।

यह भी अनुरोध है कि फिल्म प्रमाणन बोर्ड को भी सक्रिय कर दिया जाए । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाने हेतु ।

प्रतिष्ठा में,
श्रीमती सुषमा स्वराज जी,
माननीया विदेश मंत्री, भारत सरकार
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली-110011

विषय :- हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाने हेतु ।

महोदय,

भोपाल में हुए विश्व हिंदी सम्मेलन में और उसके पहले के अनेक सम्मेलनों में संकल्प पारित होते रहे हैं कि हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा बनाया जाए । प्रायः देश के विदेश मंत्रियों ने सम्मेलनों में इस संकल्प के अनुसार हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाने हेतु गंभीर प्रयत्न करने के आश्वासन भी दिए । परंतु 40 वर्षों के दौरान, जबसे प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन नागपुर में हुआ था, गंभीर प्रयत्नों की कमी महसूस होती रही है । वर्तमान सरकार देशहित के मामलों में सक्रियता से आगे बढ़ रही है, इस पृष्ठभूमि में निवेदन है कि हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की 6 भाषाओँ के साथ 7वीं भाषा बनवाने हेतु आप अपनी ओर से पूरा-पूरा प्रयत्न करने की कृपा करें । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

मोरक्को में रातों-रात लगा बुरके पर प्रतिबंध ।

प्रतिष्ठा में,
श्री राजनाथ सिंह जी,
माननीय गृह मंत्री, भारत सरकार
नॉर्थ ब्लॉक, नई दिल्ली-110001

विषय :- मोरक्को में रातों-रात लगा बुरके पर प्रतिबंध ।

महोदय,

समाचार पत्रों से निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण सूचनाएं प्रकाश में आई हैं –
1. मोरक्को में सुरक्षा कारणों से बुरके के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है ।
2. हमलावरों ने बार-बार कई अपराधों को अंजाम देने के लिए इस पोशाक का उपयोग किया है ।
3. टारुडांट में व्यापारियों को 48 घंटों के अंदर अपना मौजूदा स्टॉक नष्ट करने के आदेश भी दिए गए हैं ।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार मोरक्को इस्लामी देश है । यह तथ्यपूर्ण है कि बुरका हिंदुस्थान में मुसलमान पुरुषों के अधीन माताओं और बहनों पर एक अमानवीय अत्याचार की तरह है, क्योंकि गर्मियों में बुरका पहनना कई प्रकार की व्याधियों का कारण बनता है और अपराधी तत्त्व निश्चित रूप से बुरके में महिलाओं से अपराध करवाते हैं ।
यह भी जानकारी मिली है कि तुर्की आदि मुस्लिम देशों में स्त्रियाँ बुरका नहीं ओढ़ती हैं ।
इस पृष्ठभूमि में शीघ्र विचार करें कि हिंदुस्थान में भी बुरके पर प्रतिबंध लगा दिया जाए । इससे मुस्लिम माताएं और बहनें संत्रास से मुक्त हो जाएंगी । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

एक अफसाना भर नहीं पद्मावती ।

प्रतिष्ठा में,
श्री वेंकैया नायडू जी,
माननीय सूचना व प्रसारण मंत्री, भारत सरकार
निर्माण भवन, नई दिल्ली-110011

विषय :- एक अफसाना भर नहीं पद्मावती ।

महोदय,
रानी पद्मावती समेत हजारों महिलाओं ने जौहर कर लिया अर्थात् अग्निकुंड में कूद कर जीवनलीला समाप्त कर ली । अलाउद्दीन खिलजी जब किले के अंदर पहुँचा तो उसे राख ही मिली । राजपूताना के इतिहास की अनेक पुस्तकों में इस घटना का विवरण प्रायः इसी रूप में मिलता है कि अलाउद्दीन रानी
पद्मावती को प्रत्यक्ष देख भी नहीं सका ।
अलाउद्दीन खिलजी क्रूर, चरित्रहीन तानाशाह था, जिसने अपनी हवस के कारण हजारों महिलाओं को जौहर करने पर विवश कर दिया । ऐसी स्थिति में अफसाना बनाकर महारानी पद्मावती का तिरस्कार सब प्रकार से निंदनीय है ।
इस प्रसंग में निवेदन है कि निर्माता संजय लीला भंसाली द्वारा निर्मित फिल्म रानी पद्मावती की पटकथा की शीघ्र जाँच कराई जाए ताकि इस ऐतिहासिक घटना का श्री भंसाली फिल्म का नाम बदलकर भी चित्रण न कर सकें ।
यह भी अनुरोध है कि फिल्म प्रमाणन बोर्ड को भी सक्रिय कर दिया जाए । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

सही बयान पर व्यर्थ की आपत्ति-लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ।

प्रतिष्ठा में,
श्री मनोहर पर्रिकर जी,
माननीय रक्षा मंत्री, भारत सरकार
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली-110011

विषय :- सही बयान पर व्यर्थ की आपत्ति-लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ।

महोदय,
आपकी सेवा में लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन के लेख की छाया प्रति भेजी जा रही है । सैयद अता हसनैन जी ने अपने लेख में निम्नलिखित तथ्य प्रकाशित किए हैं-
1. भारतीय सेना प्रमुख जनरल रावत का बयान न तो अनर्गल था और न ही अपने सैनिकों को बेलगाम होने की आजादी देना था ।
2. यह महज एक संदेश था ।
3. सैन्य प्रचालन की अवधारणा घुसपैठियों की तलाश और उन्हें नेस्तनाबूद करने तक सीमित है ।
4. उनके बयान पर हंगामे की वजह सियासी है और इसका मकसद अलगाववादी विचारकों और समर्थकों के हितों की पूर्ति करना है ।

इस प्रसंग में निवेदन है कि-
सैयद अता हसनैन जी के विचारों के आलोक में भारतीय सेना प्रमुख जनरल रावत को अपने निश्चय पर अडिग रहते हुए कश्मीर में कार्रवाई करनी चाहिए और अलगाववादी तत्त्वों को बढ़ने न देते हुए उनके हौंसले पस्त करने चाहिए । अलगाववादी तत्त्वों को यह समझ में आना चाहिए कि उनकी देश विरोधी गतिविधियाँ सहन नहीं की जाएँगी । विश्वास है कि अत्यंत शिष्ट किन्तु सुदृढ़ भारतीय सेना के कमांडरों का देश सेवा का उत्साह कम नहीं होने दिया जाएगा । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें।

सादर,
भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

दीमक सरीखी धर्मनिरपेक्षता-लेखक श्री तुफैल अहमद ।

प्रतिष्ठा में,
श्री नरेन्द्र मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली-110011

विषय :- दीमक सरीखी धर्मनिरपेक्षता-लेखक श्री तुफैल अहमद ।

महोदय,

ओपेन इंस्टिट्यूट के निदेशक श्री तुफैल अहमद ने अपने लेख में निम्नलिखित तथ्य उजागर किए हैंः-
1. इन दिनों जमीयत-ए इस्लामी हिन्द, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए हिन्द संविधान के सबसे बड़े पैरोकार बन गए हैं
2. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अनुसार अगर इस्लाम खतरे में है तो संविधान भी खतरे में आ जाएगा ।
3. एक उर्दू अखबार में मुसलमानों का इम्तिहान शीर्षक से एक खबर प्रकाशित हुई जिसके अनुसार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के पहले चरण में मुसलमानों का कड़ा इम्तिहान होना है, यदि किसी अन्य भाषा के अखबार में हिन्दुओं का इम्तिहान शीर्षक से ऐसी खबर छपती तो पूरे देश में बखेड़ा खड़ा हो जाता ।
4. हर एक नेता पुलिस अधिकारी, प्रत्येक धर्म गुरु मानता है कि धर्मनिरपेक्षता भारत की मूल आत्मा पर चोट कर रही है ।
5. भारतीय समाज की सच्चाई है जहाँ धर्मनिरपेक्ष विचारधारा की डोर एक तरह के चोरों ने सँभाल रखी है ।
6. धर्मनिरपेक्ष नजरिये में दलित-मुस्लिम एकता बेहद जरूरी मानी जा रही है ।
7. चुनाव ही हैं, जो मुसलमानों के इस्लाम और हिन्दुओं को तमाम खतरों से महफूज रखेंगे, यह वाक्य सैयद आलमगीर अशरफ ने लिखा है ।

इस प्रसंग में निवेदन है कि –
1. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को गैर कानूनी घोषित कर दिया जाए ।
2. संविधान में सेक्युलर शब्द के लिए धर्मनिरपेक्ष नहीं बल्कि पंथनिरपेक्ष शब्द का प्रयोग हुआ है, इस प्रकार के आदेश निकाले जाएँ कि संविधान के अनुसार पंथनिरपेक्ष शब्द का ही सर्वत्र प्रयोग किया जाए और असंवैधानिक शब्द का प्रयोग वर्जित किया जाए ।
3. धर्म की व्याख्या, जो ऑक्सफोर्ड शब्दकोश में दी गई है, उसका व्यापक प्रचार किया जाए ।
4. श्री तुफैल अहमद, श्री तारिक फतेह और तसलीमा नसरीन जैसे मुस्लिम कट्टरपंथी विरोधी व्यक्तियों को सहयोग किया जाए ।

सादर,
भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री