Daily Archives: March 28, 2017

हिंदुस्थान के सबसे अधिक जनसंख्या वाले प्रदेश, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री चुने जाने पर अखिल भारत हिंदू महासभा की ओर से कृपया कोटिशः हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें

प्रतिष्ठा में,
मंहत श्री आदित्य नाथ जी महाराज
माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश,

सादर नमस्कार ।
हिंदुस्थान के सबसे अधिक जनसंख्या वाले प्रदेश, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री चुने जाने पर अखिल भारत हिंदू महासभा की ओर से कृपया कोटिशः हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें । संपूर्ण देश और देश के बाहर के अनेक सामाजिक हिन्दू संगठनों में आपके मुख्यमंत्री बन जाने से उत्साह की लहर दौड़ गई है और प्रदेश में हिंदुओं के दमन और हिंदू कन्याओं, किशोरियों और युवतियों के मुसलमानों द्वारा हो रहे अपहरण और तत्पश्चात् निकाह के वातावरण से हिन्दू समाज विश्वभर में पीड़ा का अनुभव करता रहा है । इतिहास में ऐसा उल्लेख है कि हिंदुस्थान का विभाजन उत्तर प्रदेश के मुसलमानों और अलीगढ़ के अंग्रेजी पढ़े कट्टर मुस्लिम उलेमाओं के षड्यंत्रों से हुआ । विभाजन के बाद भी उत्तर प्रदेश में पिछले कई दशकों में वही प्रक्रिया फिर से तेज गति से बढ़ रही थी । आपके पदासीन होने से यह विश्वास जगा है कि देवाधिदेव भगवान महादेव हिंदुस्थान और हिन्दुओं पर कृपा कर रहे हैं ।
इसलिए कृपया आनंद के वातावरण में सब हिन्दुओं की ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ ग्रहण करें ।
प्रसंगवश कुछ निवेदन भी निम्नलिखित रूप में किए जा रहे हैं :-
1.    प्रदेश में लाखों मस्जिदें, दरगाहें, खानकाहें, मजारें कब्रिस्तान और पीर हैं, जिनके द्वारा उत्तर प्रदेश की हजारों एकड़ अत्यंत उपजाऊ भूमि घेर ली गई है ।
2.     अनेक स्थानों पर अनेक कब्जे सपा सरकार की अन्देखी के कारण हुए ।
3.    भविष्य में इनके निर्माणध्स्थापना पर नियंत्रण हेतु जिलाधिकारी की अथवा पुलिस अधीक्षक की लिखित अनुमति अनिवार्य कर दी जाए किन्तु ऐसा कोई भी स्थान खेती की भूमि पर नहीं बनना चाहिए ।
4.    उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति (अब सेवा निवृत्त) श्री शंभुनाथ श्रीवास्तव के इस निर्णय को कि उत्तर प्रदेश में मुसलमान अल्पसंख्यक नहीं हैं, लागू कर दिया जाए और यदि आवश्यक हो तो अहमदियों, बोहरों, कदियानियों आदि को अल्पसंख्यक की परिभाषा में शामिल किया जा सकता है ।
5.    उत्तर प्रदेश में कई लाख मदरसे हैं, जिनमें कुरान की उन आयतों को भी जोर-शोर से पढ़ाया जा रहा है, जिनका उल्लेख न्यायाधीश जिले सिंह लोहाट ने अपने कई दशक पहले के निर्णय में इस रूप में किया था कि कि जब तक कुरआन में वे हैं तब तक विश्व में शांति नहीं होगी, उन आयतों को मदरसों के पाठ्यक्रमों में से उसी तरह निकलवा दी जाएँ, जिस तरह मिस्र में इजराइल ने दबाव डालकर निकलवा दी हैं ।
6.    मदरसों की पढाई में हिंदी की अनिवार्यता की जाए और जो मदरसे ऐसा न करें, उनका सरकारी अनुदान बंद कर दिया जाए ।
7.    कब्रिस्तानों के प्रसार पर विशेष नजर रखी जाए और उनके विस्तार को रोका जाए ताकि प्रदेश की भूमि इस तरह बर्बाद न हो । मिस्र में कब्रिस्तान की भूमि का बड़े नियंत्रित ढंग से प्रयोग किया जाता है और विस्तार नियंत्रित किया गया है ।
प्रदेश में वक्फ बोर्ड के कब्जे में जो भी खेती योग्य भूमि है, उसका तत्काल अधिग्रहण कर लिया जाए और उसका उपयोग भूमिहीन किसानों को देकर किया जाए ।
विश्वास है कि समय और परिस्थिति को ध्यान में रखकर ये सब कार्य शीघ्र आपके नेतृत्व में हो जाने से देश की रक्षा सुनिश्चित होगी ।
जब आप समझें तो मिलने का समय भी सूचित कराने का कष्ट करेंगे ।

सादर,
भवदीय,

(चन्द्र प्रकाश कौशिक)
राष्ट्रीय अध्यक्ष

दहशतगर्दी की चपेट में दरगाहें ।

प्रतिष्ठा में,
श्री राजनाथ सिंह जी,
माननीय गृह मंत्री, भारत सरकार
नॉर्थ ब्लॉक, नई दिल्ली-110001

विषय :- दहशतगर्दी की चपेट में दरगाहें ।

महोदय,

टू फेसेज ऑफ इस्लाम के लेखक श्री रामिश सिद्दीकी के उक्त विषयक लेख में लेखक ने
कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्यों की ओर ध्यान आकर्षित किया है, जो निम्नलिखित हैं –
1.    पाकिस्तान की बदहाली के लिए वही लोग जिम्मेदार हैं, जिन्होंने द्विराष्ट्र की सोच को हवा देते हुए पाकिस्तान निर्माण की मुहीम चलाई थी ।
2.    हिंसक पथ पर चल रहे मुसलमानों ने कुछ पाने के बजाय दूसरों की नजरों में सम्मान ही गँवाया है ।
लेखक ने पाकिस्तान में सूफी, शिया, लालशहवाज कलंदर की दरगाह पर हुए बम धमाके में कई दर्जन मुसलमानों के मारे जाने पर लेख में उक्त टिप्पणियाँ की हैं । शायद श्री सिद्दीकी कुछ दुखी हैं, परंतु यह नहीं भूलना चाहिए कि हिंदुस्थान में अनेक जेहादी आतंकवादी दरगाहों में और मस्जिदों में अड्डे बनाते हैं और अपने हिंसक कारनामों को अंजाम देते हैं । वहीं से उन्हें पनाह मिलती है । मदरसों में मुस्लिम बच्चों को इस्लामिक कट्टरता व राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने की शिक्षा दी जाती है।
इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि सरकार खानकाहों, दरगाहों व मदरसों पर पूरी निगरानी रखे ।आपसे निवेदन है कि विशेष प्रकोष्ठ बनाकर इन पर पूरी-पूरी निगरानी रखी जाए ।

इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,

भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष

(मुन्ना कुमार शर्मा)  राष्ट्रीय महासचिव

(वीरेश त्यागी)  राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

दिल्ली विश्वविद्यालय में बी.ए. की फिलोसोफी की वर्तमान पुस्तक के बजाय विपुल भारतीय वाङ्मय में से सामग्री रखने का निवेदन ।

प्रतिष्ठा में,
श्री प्रकाश जावडे़कर जी,
माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री, भारत सरकार
शास्त्री भवन, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद मार्ग, नई दिल्ली-110001

विषय :- दिल्ली विश्वविद्यालय में बी.ए. की फिलोसोफी की वर्तमान पुस्तक के बजाय विपुल भारतीय वाङ्मय में से सामग्री रखने का निवेदन ।

महोदय,
यह देखने में आया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के बी.ए. के फिलोसोफी के पाठ्यक्रम में पियरसन की पुस्तक रखी गई है, जो पाश्चात्य फिलोसोफी का प्रतिनिधित्व करती है । उसमें गहराई में जाने पर यह स्पष्ट पता चलता है कि उसमें लगभग 60 से 70 प्रतिशत सामग्री निरर्थक और कालबाह्य है । जिस देश में दर्शन शास्त्र के नाम पर 20-25 हजार पृष्ठों की अतुल्य सामग्री सुलभ हो, उसमें छात्रों और छात्राओं को दर्शन शास्त्र के नाम पर कुछ बेतुकी और जीवन दर्शन और आत्मिक दर्शन से प्रकाश वर्ष दूर की सामग्री पढ़ने के लिए परोसी जा रही हो तो यह भारतीय समाज और भारतवर्ष के लिए लज्जा की बात है ।
सुझाव है कि अष्टावक्र गीता और महाभारत में से दर्शन संबंधी सामग्री लेने के साथ-साथ छतरपुर में जैन महामुनि आचार्य महाप्रज्ञ जी (प्रज्ञा धाम जैन आश्रम छतरपुर नई दिल्ली) की लिखित पुस्तक दर्शन शास्त्र के पाठ्यक्रम में रखी जाए । बौद्ध दर्शन की जानकारी के लिए स्वर्गीय प्रो. जगन्नाथ उपाध्याय की पुस्तक बौद्ध मनीषा खण्ड-2 को, जिसके संपादक प्रो. राम शंकर त्रिपाठी हैं और जो केन्द्रीय बौद्ध विद्या संस्थान, चोगलमसर, लेह (लद्दाख) द्वारा प्रकाशित है, शामिल किया जाए।
इस ग्रंथ में जो अध्याय हैं, उनका वर्णन निम्नलिखित है –
1.    बहुजन कल्याण और महात्मा बुद्ध
2.    भगवान् बुद्ध की अनिवार्यता
3.    भगवान् बुद्ध का मानव धर्म
4.    भगवान् बुद्ध और आज का भारत
5.    बौद्ध दर्शन
6.    बौद्ध न्याय
7.    बौद्ध न्याय का विकास
8.    अपोहवाद
9.    बौद्ध दर्शन के जीवंत तत्त्व
10.     भारतीय चिंतन परम्परा में नए जीवन दर्शन की अपेक्षा
11.     भारतीय दर्शनों के नए वर्गीकरण की दिशा
12.    बौद्ध दर्शन का अन्य भारतीय दर्शनों पर प्रभाव आदि ।
अंग्रेजी में श्री अनवर शेख महोदय ने THE VEDIC CIVILISATION  नाम की पुस्तक लिखी है, जो PRINCIPALITY PUBLISHERS, P-O- BOX & 918, CARDIFF, UK  से प्रकाशित हुई है, उसे वैदिक दर्शन की पुस्तक के बतौर फिलोसोफी के पाठ्यक्रम में शामिल करना उपयोगी होगा, उसमें निम्नलिखित अध्याय हैं :-

1-     THE ARYAN CIVILISATION

2-         INGREDIENTS OF ARYAN CIVILISATION

3-         THE VEDA IN FOREIGN LANDS

4-         THE VEDIC ISLAM

5-         THE VEDIC SOCIETY  

इन पाठों में अत्यंत विस्तार से 257 पृष्ठों में विषय का गंभीर विवेचन स्वर्गीय अनवर शेख ने किया है । पुस्तक दिल्ली में उपलब्ध है ।
अतः निवेदन है कि इन पुस्तकों के कुछ अंश पाठ््यक्रम में शामिल कर लिए जाएँ । विश्वास है कि आप इस विषय पर शीघ्र गौर करने की कृपा करेंगे । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर

भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा) संपादक

(वीरेश त्यागी) प्रबंध संपादक