Daily Archives: April 6, 2017

उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, शांति व्यवस्था व विकास की गति को तीव्र करने की मांग।

प्रतिष्ठा में,
श्री आदित्यनाथ योगी जी,
माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश।

विषय :- उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, शांति व्यवस्था व विकास की गति को तीव्र करने की मांग।

महोदय,
उत्तर प्रदेश राज्य की कानून-व्यवस्था एवं शांति-व्यवस्था को सुदृढ़ करने, विकास की गति में तेजी लाने, महिलाओं के सम्मान की सुरक्षा करने व हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं की रक्षा करने के लिये निम्नलिखित मांगां पर शीघ्र कार्यवाही करने की कृपा करेंः-

1. सभी बूचड़खानों को तत्काल बंदकर पशुओं की जान को सुरक्षित किया जाये।
2. बीफ निर्यात की आड़ में गौमांस निर्यात को पूरी तरह से रोकने का कार्य करें। ज्ञात हो कि कई मांस निर्यातकों द्वारा बीफ निर्यात की आड़ में गौमांस का निर्यात किया जा रहा है। यह खुलासा मीडिया के माध्यम से हो चुका है।
3. शिक्षण संस्थानों, मंदिरों व रिहाईशी क्षेत्रों से कम-से-कम 500 मीटर की दूरी पर ही मांस बिक्री की अनुमति दी जाये। पुराने नियमों को समाप्त कर नए नियम शीघ्र बनाये जायें तथा अधिकारियों को नये नियम का कड़ाई से पालन करने का आदेश दें। जो अधिकारी हिन्दुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करें, उनपर कड़ी कार्रवाई की जाये।
4. भगवान राम जन्म स्थान पर मंदिर निर्माण, श्री कृष्ण जन्म स्थान पर मंदिर निर्माण व काशी विश्वनाथ मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया को तत्काल शुरू किया जाये। इस कार्य के लिये संसद में कानून बनाने व जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तुरन्त शुरू की जाये।
5. उत्तर प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी शीघ्र लागू की जाये।
6. हिन्दू धार्मिक कार्यक्रमों, उत्सवों, कथाओं व रामलीलाओं-कृष्णलीलाओं के आयोजन के लिये प्रशासनिक अनुमति की प्रक्रिया को सरल बनाया जाये।

सादर,
भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा)
राष्ट्रीय महासचिव
फोनः-093121779

तीन तलाक, शरीयत अदालतें व वक्फ बोर्ड संपत्ति को समाप्त करने की मांग।

प्रतिष्ठा में,
श्री नरेन्द्र मोदी,
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार।
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली-110011

विषय :- तीन तलाक, शरीयत अदालतें व वक्फ बोर्ड संपत्ति को समाप्त करने की मांग।

महोदय,

लखनऊ से पत्रकार श्री परवेज अहमद ने समाचार पत्रों में कुछ तथ्य प्रकाशित किए हैं, जो निम्नलिखित हैं-
1. क्या तीन तलाक पर केंद्र सरकार के रुख ने मुस्लिम महिलाओं को भाजपा को वोट देने के लिए प्रेरित किया और इन महिलाओं ने अपने हक-हकूक के लिए पारंपरिक बंधन को तोड़ने का जोखिम उठाया है ।
2. तीन तलाक के मुद्दे पर केंद्र सरकार के रुख का समर्थन करती आ रही शाइस्ता अबरका कहती हैं कि मुस्लिम महिलाएं अपने हकूक के लिए संघर्ष करने को तैयार होने लगी हैं ।

आपने अखिल भारत हिन्दू महासभा की ओर से भेजे गए पिछले अनेक पत्रों में आपसे इस विषय में किए गए अनुरोध को हाथोंहाथ लेकर मुसलमानों के घर में संत्रास सह रही माताओं और बहनों को राहत देने का संकल्प व्यक्त किया है, इसके लिए आपको हार्दिक साधुवाद ।
अब इस मामले पर मुसलमानों के घरों में पीड़ित माताओं और बहनों को राहत दिलाने के लिए उच्चतम न्यायालय में भरपूर कोशिश किए जाने का निवेदन है ।
इसके साथ-साथ देश के लगभग 500 जिलों में काम कर रही शरीयत अदालतें भी निरस्त करने की कृपा की जाए, जिससे समांतर न्याय प्रणाली ध्वस्त हो जाए ।
इस प्रसंग में यह भी निवेदन है कि वक्फ बोर्डों के कब्जे में हिन्दुस्थान की 6 लाख एकड़ भूमि का अधिग्रहणध्राष्ट्रीयकरण कर लिया जाए, क्योंकि देश की लाखों एकड़ भूमि मुसलमानों को पाकिस्तान और बांग्लादेश के रूप में पहले ही कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक नासमझी के कारण दे दी गई, इसलिए हिन्दुस्थान में वक्फ बोर्ड के नाम पर कोई संपत्ति देश में नहीं हो सकती । वैसे भी यह सारी संपत्ति हिन्दुओं से छीनी गई संपत्ति है, जैसा कि इतिहास की किताबों में उल्लेख मिलते हैं । आशा है कि शीघ्र कार्रवाई कराने की कृपा करेंगे ।

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक)राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

एनजीटी कमेटी का रवैया पक्षपातपूर्ण होने के संबंध में शिकायत ।

प्रतिष्ठा में,
श्री अनिल दवे जी,
माननीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री, भारत सरकार
पर्यावरण भवन, केन्द्रीय कार्यालय परिसर, लोधी रोड, नई दिल्ली-110003

विषय :- एनजीटी कमेटी का रवैया पक्षपातपूर्ण होने के संबंध में शिकायत ।

महोदय,

गृह मंत्रालय राजभाषा विभाग का उपर्युक्त पत्र देखने की कृपा करें। उस पत्र में यह सूचित किया गया है कि आपके मंत्रालय को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (व्यवहार और प्रक्रिया) नियम 2011 के नियम 33 में संशोधन के लिए लिखा गया है, जिसका संबंध अधिकरण की भाषा अंग्रेजी होने से है। उल्लेखनीय है कि 26 जनवरी, 1965 के पश्चात् भारत सरकार के किसी अधिकरण, आयोग, प्राधिकरण, उपक्रम आदि के नियमों में अंग्रेजी के ही प्रयोग का प्रावधान असंवैधानिक है, क्योंकि अंग्रेजी का प्रयोग राजभाषा अधिनियम 1963 के प्रावधान के अनुसार सरकारी प्रयोजनों के लिए किया जा सकता है, किन्तु अंग्रेजी ही प्रयोग किए जाने का प्रावधान अनुचित और संविधान के प्रावधानों के विपरीत है, इसलिए इस प्रावधान में तत्काल संशोधन होना आवश्यक है। प्रावधान यह होगा कि अधिकरण की भाषा हिंदी होगी किन्तु अंग्रेजी का प्रयोग किया जा सकेगा। इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें।

सादर,
भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा) संपादक
(वीरेश त्यागी) प्रबंध संपादक

बुर्के से आजादी का वक्त ।

प्रतिष्ठा में,
श्री राजनाथ सिंह जी,
माननीय गृह मंत्री, भारत सरकार
नॉर्थ ब्लॉक, नई दिल्ली-110001

विषय :- बुर्के से आजादी का वक्त ।

महोदय,

सुश्री नाइश हसन शोध छात्रा हैं और मुस्लिम महिला अधिकार कार्यकर्ता हैं । उन्होंने लेख में कुछ खुलासे किए हैं, जो निम्नलिखित हैं –
1. बाजार के जरिए यह प्रचार हुआ है कि बुर्का 3-4 साल की उम्र में भी जरूरी है ।
2. बुर्के का कुरान से कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि कुरान में औरत के पर्दे के लिए बुर्का शब्द का प्रयोग नहीं हुआ ।
3. बुर्का शब्द के मायने हैं, सर्दियों से बचने के लिए कपड़े का टुकड़ा ।
4. लिसान-अल-अरब शब्दकोश में बुर्का का अर्थ जानवरों को सर्दियों में ढकने के लिए प्रयोग किया जाने वाला कपड़ा और दूसरा अर्थ एक कवर जिसका प्रयोग गाँव की औरतें करती हैं ।
5. आज हिन्दुस्थान में हिजाब शब्द का प्रयोग बुर्के के बराबर होने लगा है, जबकि हिजाब का अर्थ कर्टेन यानि खिडकियों व दरवाजों पर लगाया जाने वाला पर्दा है ।
6. हिन्दुस्थान में पिछले 10 सालों से बुर्का पहनने का चलन बढ़ा है, यह यहाँ के मुसलमानों पर सऊदी अरब और वहाबियत का बढ़ता प्रभाव ही है ।

उपर्युक्त खुलासों से ऐसा लगता है कि मुसलमान पुरुष स्त्रियों को खिड़की और दरवाजों से कुछ अधिक नहीं समझते । सरकार को यह भी पता होगा कि अनेक देशों में बुर्के पर पाबंदी लगी है । मोरक्को में रातों-रात प्रतिबन्ध लगा दिया गया । प्रश्न यह उठता उठता है कि भारत सरकार में कब इतना दम पैदा होगा कि मुसलमानों के घरों में बंदी
माताओं और बहनों को बुर्के और हिजाब जैसे अत्याचारों से मुक्ति दिला सके । यह पुष्ट हो गया है कि भारत सरकार इन मुद्दों पर सख्त कदम उठाएगी तो भाजपा को भावी चुनावों में मुस्लिम माताओं और बहनों के वोट मिलेंगे ।
सरकार को दृढ़ता पूर्वक इन बुराइयों से मुस्लिम माताओं और बहनों को छुटकारा दिलाना चाहिए । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

चीन कार्ड पर फिर खेलने लगा नेपाल ।

प्रतिष्ठा में,
श्रीमती सुषमा स्वराज जी,
माननीया विदेश मंत्री, भारत सरकार।
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली-110011

विषय :- चीन कार्ड पर फिर खेलने लगा नेपाल ।

महोदया,

निम्नलिखित तथ्यों का संज्ञान लेकर उचित कार्यवाही करने की कृपा करेंः-
1. नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा कि भारत को नेपाल व चीन की बढ़ती दोस्ती से परेशान होने की जरूरत नहीं है ।
2. नेपाल अब खुलेआम भारत को और चीन को एक तराजू में तोलने की कोशिश में है ।
3. चीन और नेपाल के बीच सैन्य अभ्यास हो रहे हैं ।
4. मधेशियों को उचित अधिकार देने के लिए प्रस्तावित संविधान संशोधन की गति रुक सी गई है ।
5. पहली बार चीन में मुद्रित नेपाली मुद्रा काठमांडू पहुँची है ।
6. नेपाल ने चीन से सीधे सामान मँगवाना शुरू कर दिया है ।
7. नेपाल के राष्ट्रीय बैंक में जमा अरबों रूपये के भारतीय नोट बिना किसी निर्णय के पड़े हुए हैं ।
उक्त तथ्य से यह निष्कर्ष निकलता है कि नेपाल को चीन अपने पंजों में फँसाने की जुगत बैठा रहा है और नेपाल के प्रधानमंत्री श्री पुष्प दहल प्रचंड इस स्थिति को कदाचित इसलिए नहीं समझ रहे हैं क्योंकि वे कम्युनिस्ट हैं और कौम को नष्ट करना कम्यूनिस्टों की फितरत है । इसके अनेक प्रमाण हिंदुस्थान में देखे गए हैं । अतः सुझाव है कि-
1. चीन से हिंदुस्थान में भारी मात्रा में आने वाले माल को युक्तिपूर्वक रोका जाए, जिससे चीन को घाटा महसूस होने लगे यानि उसकी अर्थव्यवस्था को तगड़ा आजादी झटका लगे ।
2. तिब्बत के बारे में पुरानी नीति में संशोधन करके उसे स्वतंत्र देश की मान्यता दी जाए ।
3. ताईवान के साथ मित्रता बढ़ाई जाए ताकि चीन असहज महसूस करे ।

इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव

बच्चों पर अंग्रेजी लादना ऐसा ही है जैसे हिरणों पर घास लादना-डॉ. वेद प्रताप वैदिक ।

प्रतिष्ठा में,
श्री नरेन्द्र मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार।
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली-110011

विषय :- बच्चों पर अंग्रेजी लादना ऐसा ही है जैसे हिरणों पर घास लादना-डॉ. वेद प्रताप वैदिक ।

महोदय,

“अब हिरणों पर लदेगी घास” शीर्षक से प्रकाशित लेख में विद्वान लेखक डा. वेद प्रताप वैदिक ने उल्लेख किया है कि-
1.मोदी ने 12 सचिवों की एक समिति बनाई, यह तय करने के लिए कि देश के करोड़ों बच्चों की शिक्षा का माध्यम क्या हो और उन्हें कौन-सी भाषा पढाई जाए । इस निर्णय पर डॉ. वैदिक ने चेतावनी दी है कि हमारे सरकारी अफसर नरेंद्र मोदी सरकार का बेड़ा गर्क करने पर उतारू हैं, क्योंकि इन 12 रत्नों (सचिवों) के अनुसार छठी कक्षा से आगे तक सभी कक्षाओं में अंग्रेजी की पढाई अनिवार्य होनी चाहिए और देश के 6,612 खण्डों (ब्लॉकों) में सरकार को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की स्थापना करनी चाहिए ।
2.डॉ. वैदिक का यह तर्कयुक्त सुझाव है कि शिक्षा में भाषा नीति बनाने के लिए अफसरों के बजाय शिक्षाविदों और भाषाविदों की समिति बनाई जानी चाहिए ।
डॉ. वैदिक के ये विचार सुचिंतित हैं और दुनियाँ के प्रगत देशों के भाषायी अनुभवों के आधार पर हैं ।
डॉ. वैदिक का यह कथन सही है कि देश में हर साल करोड़ों बच्चे अंग्रेजी की जबर्दस्त पढ़ाई के कारण स्कूल छोड़ देते हैं और सबसे ज्यादा बच्चे अंग्रेजी में फेल होते हैं, अंग्रेजी रटने के कारण अन्य विषयों की उपेक्षा होती है और छात्रों की मौलिकता नष्ट होती है, वे नकलची बन जाते हैं, स्वभाषा और स्वदेश प्रेम में गिरावट आती है ।
हमारे देश के बिहार राज्य में मोटरसाइकिलों, साइकिलों और तिपहियों पर भैंसें ढोई गई होने की सूचनाएँ जगजाहिर हैं और ऐसे भ्रष्ट नेता बाहर घूम रहे हैं, इसी प्रकार का हिरणों पर घास लादने का उदाहरण डॉ. वैदिक ने बच्चों पर अंग्रेजी लादने के प्रसंग में प्रस्तुत किया है ।
प्रधानमंत्री जी और मानव संसाधन विकास मंत्रालय अंग्रेजी पढ़ाने की अनिवार्यता न करें, बल्कि इसे वैकल्पिक रखें । उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति जी का 4 नवंबर, 1991 के संकल्प संख्या 13015ध्1ध्91-रा० भा० (घ) के बिंदु संख्या 22 (ग) के अनुसार देश में सभी जगह विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में विभिन्न विषयों की पढाई हिन्दी में भी करने के लिए उपयुक्त व्यवस्था उपलब्ध कराने का आदेश है, जिसे अब 25 वर्ष हो गए हैं । यह स्वाभाविक है कि अंग्रेजी भाषा को अनिवार्यतः थोपने से राष्ट्रपति जी के और भारत सरकार के अब तक के संघ की राजभाषा हिन्दी को लागू करने के आदेश निरर्थक हो जाएँगे । यह भी कहना आवश्यक है कि इन आदेशों के पालन हेतु कोई उल्लेखनीय ठोस कार्रवाई नहीं हुई दिखाई पडती है । इन्हीं आदेशों के बिंदु 22 (छ) में भी हिन्दी माध्यम से कृषि, इंजीनियरी और आयुर्विज्ञान की पढ़ाई की व्यवस्था के आदेश दिए गए हैं । विश्वास है कि अविलंब वांछित आदेश देने की कृपा करेंगे ।

सादर,
भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा)
राष्ट्रीय महासचिव

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में सुधार लाने की मांग।

प्रतिष्ठा में,
श्री प्रकाश जावड़ेकर जी,
माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री, भारत सरकार
शास्त्री भवन, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद मार्ग, नई दिल्ली-110001

विषय :- जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में सुधार लाने की मांग।

महोदय,

सर्वविदित है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय वाममार्गियों का अड्डा बन गया है, जिनका लक्ष्य ऋण लेओ और घी पीओ है । ऐसे वातावरण को बदलने का कदाचित एक ही तरीका है कि विश्वविद्यालय के संकाय धीरे-धीरे घटाए जाएँ और अनेक पाठ्यक्रम रद्द कर दिए जाएँ, साथ-साथ धन का आबंटन घटा दिया जाए । लगभग ऐसी ही स्थिति जामिया मिलिया और अलीगढ़ विश्वविद्यालय की है । वहाँ भी सरकार को ऐसे ही कदम उठाने चाहिए, क्योंकि ये नासूर बन गए हैं और इनका उपचार शल्यक्रिया ही है । विश्वास है कि इस दिशा में रणनीति बनाई जाएगी और उसका कार्यान्वयन तेजी से किया जाएगा । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

दक्षिण सागर में चीन द्वारा बन रहे मिसाइल भंडार गृह पर सतर्क होने का सुझाव।

प्रतिष्ठा में,
श्री अरूण जेटली जी,
माननीय रक्षा मंत्री, भारत सरकार
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली-110011

विषय :- दक्षिण सागर में चीन द्वारा बन रहे मिसाइल भंडार गृह पर सतर्क होने का सुझाव।

महोदय,

समाचारों से यह पता चला है कि चीन ने बड़ी गोपनीयता और तीव्रगति से दक्षिण चीन सागर में कुछ कृत्रिम द्वीप बना लिए हैं और उन पर कई दर्जन भवन बनाने में जुटा हुआ है । इनमें प्रक्षेपास्त्र जमा होंगे, जिनका इस्तेमाल चीन हिन्दुस्थान सहित अन्य अनेक देशों के विरुद्ध कर सकेगा । द्वीपों पर हवाई पट्टियाँ भी बना ली गई हैं ।
प्रश्न उठते हैं कि हिन्दुस्थान का इस नई मुसीबत के प्रति क्या रुख है और केन्द्रीय सरकार कितनी शीघ्रता से इस मुसीबत से निपटने में सफल होगी ? हमारे देश की क्या रणनीति है और कैसे चीन की इस नई आफत से निपटा जाएगा ?
विश्वास है कि देश की केन्द्रीय सरकार रक्षात्मक कार्यकलापों से आश्वस्त करेगी । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी)राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री