Monthly Archives: October 2017

दीपावली, छठ पर्व एवं अन्य अवसरों पर पूरे देष में पटाखों की ब्रिकी व चलाने पर रोक लगाने के लिये अर्जुन गोपाल एवं अन्य द्वारा दायर की गई याचिका का विरोध करने व याचिकाकर्ताओं द्वारा हिन्दू परंपराआें को रोकने हेतु बार-बार याचिका दायर करने के उद्देष्यों की जांच कराने हेतु।

प्रतिष्ठा में,
श्री नरेन्द्र मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली-110011

विषयः दीपावली, छठ पर्व एवं अन्य अवसरों पर पूरे देष में पटाखों की ब्रिकी व चलाने पर रोक लगाने के लिये अर्जुन गोपाल एवं अन्य द्वारा दायर की गई याचिका का विरोध करने व याचिकाकर्ताओं द्वारा हिन्दू परंपराआें को रोकने हेतु बार-बार याचिका दायर करने के उद्देष्यों की जांच कराने हेतु।

महोदय,

आपको ज्ञात है कि दीपावली एवं छठ पर्व हिन्दुस्तान के 100 करोड़ हिन्दुओं का अति महत्वपूर्ण पर्व है। हमारी परंपरा है कि इस अवसर पर हिन्दू दीये जलाते हैं और पटाखे चलाते हैं। पटाखे चलाने में बच्चों की खास रूचि होती है। दीपावली के दिन पटाखे फोड़ने की परंपरा अति प्राचीन है। जब भगवान राम रावण का अंत कर अयोध्या लौटे थे, उस खुषी में यह त्यौहार पहली बार मनायी गयी थी। अब प्रत्येक वर्ष मनायी जाती है।
समाचारपत्रों से ज्ञात हुआ है कि अर्जुन गोपाल सहित तीन बच्चों द्वारा माननीय उच्चतम न्यायानय के समक्ष एक याचिका दायर की गई है, जिसके द्वारा पूरे देष में पटाखों की बिक्री व चलाने पर रोक लगाने की गुहार की गई है। दीपावली, छठ सहित सभी खुषी के मौकों पर पटाखा चलाने की परंपरा हमारे समाज में है। प्रदूषण का एक मात्र माध्यम पटाखा नहीं है।
सत्यता है कि पटाखों के अतिरिक्त कई अन्य माध्यमों से पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के सुचारू नहीं होने से प्रदूषण ज्यादा बढ़ रहा है। बकरीद के दिन लाखों बकरों की बलि के कारण पर्यावरण को अत्यधिक नुकसान पहुंचता है। परन्तु इस पर केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कभी ध्यान नहीं गया है। लाऊडस्पीकर से अजान पढ़ने के कारण बड़े स्तर पर ध्वनि प्रदूषण हो रहा है। परन्तु इसे आजतक नहीं रोका गया है।
हिन्दू विरोधी लोग लगातार हिन्दुओं के धार्मिक पर्वों व परंपराओं के साथ षड्यंत्र करते रहते हैं। बार-बार याचिका दायर कर हिन्दू त्योहारों पर आक्रमण हो रहा है। कभी दीपावली पर पटाखा बैन के लिये याचिका, कभी जलीकटटू पर रोक के लिये याचिका, कभी नदी में मूर्तियों के विसर्जन पर रोक के लिये याचिका। हमें डर है कि कभी याचिका दाखिल कर हिन्दुओं के पर्व-त्योहार मनाने पर भी रोक लगावायी जा सकती है।
आपसे अनुरोध है कि हिन्दुस्तान के 100 करोड़ हिन्दुओं की भावनाओं की रक्षा करने के लिये दीपावली, छठ पर्व एवं अन्य अवसरों पर पटाखों की बिक्री व चलाने पर रोक लगाने के लिये अर्जुन गोपाल एवं अन्य की उच्चतम न्यायालय में दायर याचिका का विरोध करने की कृपा करें। साथ-ही-साथ याचिकाकर्ताओं का पुलिस जांच कराकर यह पता लगाने की कृपा करें कि लगातार हिन्दू परंपराओं को रोकने के लिये याचिका दायर करने की पीछे उनका उदेष्य क्या है तथा उनके पीछे कौन-सी हिन्दू विरोधी शक्तियों का हाथ है।

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाष कौषिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष

(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव

(वीरेष त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

दीपावली, छठ पर्व एवं अन्य अवसरों पर पूरे देष में पटाखों की ब्रिकी व चलाने पर रोक लगाने के लिये अर्जुन गोपाल एवं अन्य द्वारा दायर की गई याचिका को निरस्त करने व याचिकाकर्ताओं द्वारा हिन्दू परंपराआें को रोकने हेतु बार-बार याचिका दायर करने के उद्देष्यों की जांच कराने हेतु।

प्रतिष्ठा में,
माननीय मुख्य न्यायाधीष
भारत का उच्चतम न्यायालय।

विषयः दीपावली, छठ पर्व एवं अन्य अवसरों पर पूरे देष में पटाखों की ब्रिकी व चलाने पर रोक लगाने के लिये अर्जुन गोपाल एवं अन्य द्वारा दायर की गई याचिका को निरस्त करने व याचिकाकर्ताओं द्वारा हिन्दू परंपराआें को रोकने हेतु बार-बार याचिका दायर करने के उद्देष्यों की जांच कराने हेतु।

महोदय,

आपको ज्ञात है कि दीपावली एवं छठ पर्व हिन्दुस्तान के 100 करोड़ हिन्दुओं का अति महत्वपूर्ण पर्व है। हमारी परंपरा है कि इस अवसर पर हिन्दू दीये जलाते हैं और पटाखे चलाते हैं। पटाखे चलाने में बच्चों की खास रूचि होती है। दीपावली के दिन पटाखे फोड़ने की परंपरा अति प्राचीन है। जब भगवान राम रावण का अंत कर अयोध्या लौटे थे, उस खुषी में यह त्यौहार पहली बार मनायी गयी थी। अब प्रत्येक वर्ष मनायी जाती है।
समाचारपत्रों से ज्ञात हुआ है कि अर्जुन गोपाल सहित तीन बच्चों द्वारा माननीय उच्चतम न्यायानय के समक्ष एक याचिका दायर की गई है, जिसके द्वारा पूरे देष में पटाखों की बिक्री व चलाने पर रोक लगाने की गुहार की गई है। दीपावली सहित सभी खुषी के मौकों पर पटाखा चलाने की परंपरा हमारे समाज में है। प्रदूषण का एक मात्र माध्यम पटाखा नहीं है।
सत्यता है कि पटाखों के अतिरिक्त कई अन्य माध्यमों से पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के सुचारू नहीं होने से प्रदूषण ज्यादा बढ़ रहा है। बकरीद के दिन लाखों बकरों की बलि के कारण पर्यावरण को अत्यधिक नुकसान पहुंचता है। परन्तु इस पर केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कभी ध्यान नहीं गया है। लाऊडस्पीकर से अजान पढ़ने के कारण बड़े स्तर पर ध्वनि प्रदूषण हो रहा है। परन्तु इसे आजतक नहीं रोका गया है।
हिन्दू विरोधी लोग लगातार हिन्दुओं के धार्मिक पर्वों व परंपराओं के साथ षड्यंत्र करते रहते हैं। बार-बार याचिका दायर कर हिन्दू त्योहारों पर आक्रमण हो रहा है। कभी दीपावली पर पटाखा बैन के लिये याचिका, कभी जलीकटटू पर रोक के लिये याचिका, कभी नदी में मूर्तियों के विसर्जन पर रोक के लिये याचिका। हमें डर है कि कभी याचिका दाखिल कर हिन्दुओं के पर्व-त्योहार मनाने पर भी रोक लगावायी जा सकती है।
आपसे अनुरोध है कि हिन्दुस्तान के 100 करोड़ हिन्दुओं की भावनाओं की रक्षा करते हुए दीपावली, छठ पर्व सहित अन्य खुषी के अवसरों पर पटाखों की बिक्री व चलाने पर रोक लगाने के लिये अर्जुन गोपाल एवं अन्य की याचिका को तत्काल निरस्त करने की कृपा करें। साथ-ही-साथ याचिकाकर्ताओं का पुलिस जांच कराकर यह पता लगाने की कृपा करें कि लगातार हिन्दू परंपराओं को रोकने के लिये याचिका दायर करने की पीछे उनका उदेष्य क्या है तथा उनके पीछे कौन-सी हिन्दू विरोधी शक्तियों का हाथ है।
सादर,
भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा)
राष्ट्रीय महासचिव
फोनः9312177979

सूर्योपासना के महान छठ पर्व को राष्ट्रीय पर्व घोषित करने व इस अवसर पर 26 अक्टूबर, कार्तिक शुल्क षष्ठी के दिन पूरे देष में सार्वजनिक अवकाष घोषित करने की मांग।

प्रतिष्ठा में,
श्री नरेन्द्र मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार।

विषय :-सूर्योपासना के महान छठ पर्व को राष्ट्रीय पर्व घोषित करने व इस अवसर पर 26 अक्टूबर, कार्तिक शुल्क षष्ठी के दिन पूरे देष में सार्वजनिक अवकाष घोषित करने की मांग।
महोदय,
आपको ज्ञात है कि छठ पर्व भगवान सूर्य की आराधना का महान लोकपर्व है। यह बिहार, पूर्वांचल, झारखंड, दिल्ली के प्रमुख पर्वों में से एक है। देष के सभी प्रमुख शहरों में छठ पर्व मनाने वाले श्रद्धालु बड़ी संख्या में स्थायी रूप से निवास करते हैं। बिहार, झारखंड, दिल्ली में छठ पर्व के दिन सार्वजनिक अवकाष है। पूर्व में उत्तर प्रदेष में भी छठ पर्व के दिन सार्वजनिक अवकाष होती थी। परन्तु अब भाजपा सरकार ने अवकाष को समाप्त कर दिया है।
आपको ज्ञात है कि सूर्योपासना का सबसे महान पर्व छठ मनाना अत्यंत ही कठिन है। यह चार दिनों का पर्व है। यह पर्व 24 अक्टूबर कार्तिक शुल्क चतुर्थी को नहाय-खायं के साथ शुरू हो गई है । आज 25 अक्टूबर, कार्तिक शुक्ल पंचमी को सायं काल खरना की पूजा होगी। खरना की पूजा के साथ ही 36 घ्ांटें का निर्जला व्रत शुरू होगी, जो 27 अक्टूबर को प्रातः उदीयमान भगवान सूर्य को अर्ध्य देने के बाद समाप्त होगी। 26 अक्टूबर, कार्तिक शुल्क षष्ठी के सायंकाल नदी, तालाब आदि में खड़े होकर छठ व्रती अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्ध्य देंगे। इस पर्व में प्रसाद भी घर में ही बनती है। स्वच्छता का विषेष ध्यान रखना पड़ता है। यह लोकपर्व स्वच्छता व सफाई को पवित्रता की ओर ले जाती है। यह समानता, सामूहिकता व महिला सषक्तीकरण का पर्व है। यह पर्व देष की संस्कृति व परंपराओ कें गौरव को बढाने वाला है।
अतः आपसे अनुरोध है कि छठ महापर्व को राष्ट्रीय पर्व घोषित करें तथा 26 अक्टूबर, कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन छठ पर्व के अवसर पर सार्वजनिक अवकाष घोषित कर छठव्रतियों व श्रद्धालुओं को छठ पर्व मनाने में सहयोग करने की कृपा करें।
सादर,
भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव, अखिल भारत हिन्दू महासभा
राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय प्रवासी महासभा

सूर्योपासना के महान छठ पर्व के अवसर पर 26 अक्टूबर, कार्तिक शुल्क षष्ठी के दिन सार्वजनिक अवकाष घोषित करने की मांग।

प्रतिष्ठा में,
श्री आदित्यनाथ योगी जी,
माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश।

विषय :-सूर्योपासना के महान छठ पर्व के अवसर पर 26 अक्टूबर, कार्तिक शुल्क षष्ठी के दिन सार्वजनिक अवकाष घोषित करने की मांग।

महोदय,
आपको ज्ञात है कि छठ पर्व भगवान सूर्य की आराधना का महान लोकपर्व है। यह बिहार, पूर्वांचल, झारखंड, दिल्ली के प्रमुख पर्वों में से एक है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर, इलाहाबाद, लखनऊ, बनारस, गोरखपुर साहित उत्तर प्रदेष के सभी प्रमुख शहरों में छठ पर्व मनाने वाले श्रद्धालु बड़ी संख्या में स्थायी रूप से निवास करते हैं। बिहार, झारखंड, दिल्ली में छठ पर्व के दिन सार्वजनिक अवकाष है। पूर्व में उत्तर प्रदेष में भी छठ पर्व के दिन सार्वजनिक अवकाष होती थी। परन्तु अब अवकाष को समाप्त कर दिया गया है। प्रदेष सरकार के इस आदेष के कारण अब उत्तर प्रदेष में छठ पर्व के दिन सार्वजनिक अवकाष नहीं है।
आपको ज्ञात है कि सूर्योपासना का सबसे महान पर्व छठ मनाना अत्यंत ही कठिन है। यह चार दिनों का पर्व है। यह पर्व 24 अक्टूबर कार्तिक शुल्क चतुर्थी को नहाय-खायं के साथ शुरू होगी । 25 अक्टूबर, कार्तिक शुक्ल पंचमी को सायं काल खरना की पूजा होगी। खरना की पूजा के साथ ही 36 घ्ांटें का निर्जला व्रत शुरू होगी, जो 27 अक्टूबर को प्रातः उदीयमान भगवान सूर्य को अर्ध्य देने के बाद समाप्त होगी। 26 अक्टूबर, कार्तिक शुल्क षष्ठी के सायंकाल नदी, तालाब आदि में खड़े होकर छठ व्रती अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्ध्य देंगे। इस पर्व में प्रसाद भी घर में ही बनती है। स्वच्छता का विषेष ध्यान रखना पड़ता है।
अतः आपसे अनुरोध है कि 26 अक्टूबर, कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन छठ पर्व के अवसर पर सार्वजनिक अवकाष घोषित कर छठव्रतियों व श्रद्धालुओं को छठ पर्व मनाने में सहयोग करने की कृपा करें।
सादर,
भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव, अखिल भारत हिन्दू महासभा
राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय प्रवासी महासभा

ताजमहल को तोड़कर तेजोमहालय शिव मंदिर बनाये उत्तर प्रदेश की सरकार, रामजन्म भूमि पर मंदिर का निर्माण संसद में कानून बनाकर शीघ्र होः हिन्दू महासभा

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2017

ताजमहल को तोड़कर तेजोमहालय शिव मंदिर बनाये उत्तर प्रदेश की सरकार, रामजन्म भूमि पर मंदिर का निर्माण संसद में कानून बनाकर शीघ्र होः हिन्दू महासभा

अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय महासचिव मुन्ना कुमार शर्मा ने उत्तर प्रदेश के महंत आदित्यनाथ योगी सरकार से मांग की है कि आगरा स्थित ताजमहल को तोड़कर तेजोमहालय शिव मंदिर बनाया जाये। उन्होंने कहा कि ताजमहल की जगह पूर्व में तेजोमहालय शिव मंदिर था। परन्तु शाहजहां ने उसे तोड़वाकर अपनी महबूबा मुमताज की याद में ताजमहल बनवा दिया। उन्होंने कहा कि यदि उसकी खुदाई कराकर पत्थरों की उम्र की जांच करायी जाये, तो स्पष्ट हो जायेगा कि बना हुआ ढ़ांचा ताजमहल से बहुत पहले का है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम शासकों द्वारा हिन्दू मंदिरों को तोड़कर मस्जिद या मकबरों का निर्माण बड़े पैमाने पर किया गया था। लगभग 3000 बड़े मंदिरों को तोड़ा गया था। उन्होंने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ से कहा है कि ताजमहल को तोड़कर मंदिर बनाने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाये।
उधर राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्र प्रकाष कौशिक ने कहा है कि अयोध्या स्थित भगवान राम के जन्मस्थान पर श्रीराम मंदिर का निर्माण संसद में विषेष कानून बनाकर शीघ्र किया जाये। उन्होंने कहा कि देश की जनता ने 2014 में भाजपा को वोट इसी उम्मीद से दिया था। परन्तु केन्द्र की भाजपा सरकार देश के 100 करोड़ हिन्दुओं को धोखा दे रही है।

(वीरेष त्यागी)
राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

दीपावली के अवसर पर पटाखों की ब्रिकी पर रोक लगाने के निर्णय को तत्काल वापस लेने का अनुरोध।

प्रतिष्ठा में,
माननीय मुख्य न्यायधीश
भारत का उच्चतम न्यायालय

विषयः दीपावली के अवसर पर पटाखों की ब्रिकी पर रोक लगाने के निर्णय को तत्काल वापस लेने का अनुरोध।

महोदय,

आपको ज्ञात है कि दीपावली हिन्दुस्तान के 100 करोड़ हिन्दुओं का अति महत्वपूर्ण पर्व है। हमारी परंपरा है कि इस अवसर पर हिन्दू दीये जलाते हैं और पटाखे चलाते हैं। पटाखे चलाने में बच्चों की खास रूचि होती है। दीपावली के दिन पटाखे फोड़ने की परंपरा अति प्राचीन है। जब भगवान राम रावण का अंत कर अयोध्या लौटे थे, उस खुशी में यह त्यौहार पहली बार मनायी गयी थी। अब प्रत्येक वर्ष मनायी जाती है।
परन्तु माननीय उच्चतम न्यायालय के एक आदेश से दीपावली में दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की ब्रिकी पर रोक लग गया है। अब 31 अक्टूबर तक दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की ब्रिकी नहीं हो पायेगी। परिणामस्वरूप 19 अक्टूबर को दीपावली के दिन दिल्ली-एनसीआर के लोग पटाखे नहीं जला पायेंगे। उच्चतम न्यायालय के इस निर्णय से हमारी प्राचीन पंरपरा पर कुठाराघात हो रहा है।
जबकि यह सत्यता है कि पटाखों के अतिरिक्त कई अन्य माध्यमों से पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के सुचारू नहीं होने से प्रदूषण ज्यादा बढ़ रहा है। बकरीद के दिन लाखों बकरों की बलि के कारण पर्यावरण को अत्यधिक नुकसान पहुंचता है। परन्तु इस पर न तो केन्द्रीय प्रदूषण नियंतण बोर्ड का कभी ध्यान गया है और न ही किसी न्यायालय का। लाऊड स्पीकर से अजान पढ़ने के कारण बड़े स्तर पर ध्वनि प्रदूषण हो रहा है। परन्तु इसे आजतक नहीं रोका गया है।
हिन्दूविरोधी लोग लगातार हिन्दुओं के साथ षड्यंत्र करते रहते हैं। बार-बार याचिका दाखिल कर हिन्दू त्योहारों पर आक्रमण हो रहा है। कभी दीपावली पर पटाखा बैन के लिये याचिका, कभी जलीकटटू पर रोक के लिये याचिका कभी नदी में मूर्तियों के विसर्जन पर रोक के लिये याचिका। हमें डर है कि कभी याचिका दाखिल कर हिन्दुओं के पर्व-त्योहार मनाने पर भी रोक लगावायी जा सकती है।
आपसे अनुरोध है कि हिन्दुस्तान के 100 करोड़ हिन्दुओं की भावनाओं की रक्षा करने व दिल्ली-एनसीआर के लोगों को दीपावली हर्षोल्लास के साथ मानने का अवसर प्रदान करने के लिये दीपावली पर पटाखा बैन का आदेश तत्काल वापस लिया जाये। आपसे अनुरोध है कि इस पत्र को ही याचिका मान लिया जाये। सादर
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष

(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव

(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

दीपावली के अवसर पर उच्चतम न्यायालय के पटाखों की ब्रिकी पर रोक लगाने के निर्णय को तत्काल निष्प्रभावी करने के लिये अध्यादेश लाने की मांग।

प्रतिष्ठा में,
1. श्री रामनाथ कोबिंद जी (माननीय भारत के राष्ट्रपति)

2. श्री नरेन्द्र मोदी जी (माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार)

विषयः दीपावली के अवसर पर उच्चतम न्यायालय के पटाखों की ब्रिकी पर रोक लगाने के निर्णय को तत्काल निष्प्रभावी करने के लिये अध्यादेश लाने की मांग।

महोदय,

आपको ज्ञात है कि दीपावली हिन्दुस्तान के 100 करोड़ हिन्दुओं का अति महत्वपूर्ण पर्व है। हमारी परंपरा है कि इस अवसर पर हिन्दू दीये जलाते हैं और पटाखे चलाते हैं। पटाखे चलाने में बच्चों की खास रूचि होती है। दीपावली के दिन पटाखे फोड़ने की परंपरा अति प्राचीन है।
परन्तु माननीय उच्चतम न्यायालय ने एक आदेश में दीपावली में दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की ब्रिकी पर रोक लगा दिया है। अब 31 अक्टूबर तक दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की ब्रिकी नहीं हो पायेगी। परिणामस्वरूप 19 अक्टूबर को दीपावली के दिन दिल्ली-एनसीआर के लोग पटाखे नहीं जला पायेंगे। उच्चतम न्यायालय के इस निर्णय से हमारी प्राचीन पंरपरा पर कुठाराघात हो रहा है।
जबकि यह सत्यता है कि पटाखों के अतिरिक्त कई अन्य माध्यमों से पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के सुचारू नहीं होने से प्रदूषण ज्यादा बढ़ रहा है। बकरीद के दिन लाखों बकरों की बलि के कारण पर्यावरण को अत्यधिक नुकसान पहुंचता है। परन्तु इस पर न तो केन्द्रीय प्रदूषण नियंतण बोर्ड का कभी ध्यान गया है और न ही किसी न्यायालय का। इस निर्णय से ऐसा आभास हो रहा है कि यह मुगलकाल या अंग्रेजों का शासन हैं।
हिन्दूविरोधी लोग लगातार हिन्दुओं के साथ षड्यंत्र करते रहते हैं। बार-बार हिन्दू त्योहारों पर आक्रमण हो रहा है। कभी दीपावली पर पटाखा बैन, कभी जलीकटटू पर रोक, कभी नदी में मूर्तियों के विसर्जन पर रोक। हमें डर है कि कभी हिन्दुओं के पर्व-त्योहार मनाने पर भी रोक लगायी जा सकती है।
आपसे अनुरोध है कि हिन्दुस्तान के 100 करोड़ हिन्दुओं की भावनाओं की रक्षा करने व दिल्ली-एनसीआर के लोगों को दीपावली हर्षोल्लास के साथ मानने का अवसर प्रदान करने के लिये एक अध्यादेश तुरन्त लाया जाये, जिससे उच्चतम न्यायालय का दीपावली पर पटाखा बैन का आदेश तत्काल निष्प्रभावी हो जाये।

सादर
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष

(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव

(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

पर्सनल लॉ बोर्ड को गैर कानूनी घोषित करने की मांग।

प्रतिष्ठा में,
श्री नरेन्द्र मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली-110011

विषय:- पर्सनल लॉ बोर्ड को गैर कानूनी घोषित करने की मांग।

महोदय,
पूर्णतः गैर-कानूनी और असंवैधानिक मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की भोपाल में हुई बैठक में हिन्दुस्थान के उच्चतम न्यायालय और केन्द्रीय सरकार को निम्नलिखित चेतावनियाँध्धमकियाँ दी गई हैं –
1. हमारा काम शरीयत की हिफाजत करना है । (खालिद फिरंगी महली)
2. शरीयत में कोर्ट का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा । (वली रहमानी)
3. सत्ताधारी पार्टी हिन्दुओं और मुसलमानों को लड़ाकर सियासी फायदा उठाना चाहती है । (जफरयाब जिलानी)
4. हुकूमत धार्मिक मामलों में कानून न बनाए । (खालिद फिरंगी महली)
5. फैसले से (तीन तलाक पर उच्चतम न्यायालय का फैसला) महिलाओं का भला कैसे हो सकता है । (जलालउद्दीन उमरी)

भावार्थ यह है कि –
1. मुसलमान मुल्ला-मौलवी और गैर-कानूनी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मुसलमान माताओं और बहनों को प्रताड़नाओं से मुक्त नहीं करेंगे और न होने देंगे ।
2. तीन तलाक के समाप्त होने के पश्चात् भी मुस्लिम माताओं और बहनों का भला नहीं होने दिया जाएगा ।

निम्नलिखित निवेदनों पर शीघ्र निर्णय लेने की कृपा करें –
1. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को गैर कानूनी घोषित कर दिया जाए ।
2. तीन तलाक की समाप्ति के पश्चात् तलाक-ए-अहसन और तलाक-ए-हसन भी समाप्त कर दिए जाएँ ।
3. उच्चतम न्यायालय के निर्णय के पश्चात् मुस्लिम निकाह, तलाक, गुजारा भत्ता आदि विषयों पर केन्द्रीय कानून बना दिए जाएँ ।
4. सरकार को धमकियाँ देने वाले मुल्ला-मौलवियों पर कानून की धाराओं के तहत कार्रवाई आरम्भ की जाए, क्योंकि उक्त धमकियाँ बगावत के लक्षण हैं ।
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक)राष्ट्रीय अध्यक्ष

(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव

(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री

हरियाणा में किसी भी विषय में एम.ए. में प्रवेश के लिए बी.ए. में अंग्रेजी की अनिवार्यता अवांछनीय । इस प्रावधान को तत्काल हटाया जाना आवश्यक ।

प्रतिष्ठा में,
श्री मनोहर लाल खट्टर जी,
माननीय मुख्यमंत्री, हरियाणा
सिविल सचिवालय, सेक्टर-1, चंडीगढ़ (हरियाणा)

विषय:- हरियाणा में किसी भी विषय में एम.ए. में प्रवेश के लिए बी.ए. में अंग्रेजी की अनिवार्यता अवांछनीय । इस प्रावधान को तत्काल हटाया जाना आवश्यक ।

महोदय,
यह जानकार बहुत आश्चर्य हुआ कि हरियाणा में किसी भी विषय में एम.ए. में प्रवेश हेतु बी.ए. की कक्षाओं में अंग्रेजी विषय होने का प्रावधान है । यह प्रावधान अनावश्यक है और शिक्षा के प्रसार में बाधक है । इसलिए इस अंग्रेजी की अनिवार्यता को तत्काल हटाने की कृपा करें ताकि गाँव-गाँव तक के युवाओं में शिक्षा का अधिकतम प्रसार हो सके और उच्च शिक्षा प्राप्ति में अंग्रेजी का स्पीड ब्रेकर न रहे । इस सम्बंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,
भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा) संपादक

(वीरेश त्यागी) प्रबंध संपादक