कृषि की पढ़ाई स्नातकोत्तर स्तर पर वैकल्पिक रूप में हिन्दी माध्यम में कराए जाने का सुझाव।

प्रतिष्ठा में,
श्री राधा मोहन सिंह जी,
माननीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, भारत सरकार
कृषि भवन, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मार्ग, नई दिल्ली-110001

विषय :- कृषि की पढ़ाई स्नातकोत्तर स्तर पर वैकल्पिक रूप में हिन्दी माध्यम में कराए जाने का सुझाव।

महोदय,
निवेदन है कि हिन्दुस्थान में गन्ने और अनाज की खेती लाखों वर्षों से हो रही है और किसानों ने हिन्दुस्थान की जनता को अन्न की कमी कभी नहीं होने दी । प्राचीनकाल में संस्कृत के माध्यम से ज्ञान कराया जाता था । संभवतः सन् 1857 तक भी देशी राज्यों में कृषि की शिक्षा और उपज बढ़ाने का ज्ञान हिन्दी में दिया जाता था । उसके बाद कृषि की पढ़ाई शायद 1900 ई० के बाद अंग्रेजी में शुरू हुई होगी । फलस्वरूप उपज में वृद्धि दर कम हो गई और किसान को अपने परंपरा से प्राप्त ज्ञान के बजाय अंग्रेजी में वह ज्ञान मिलने लगा जो हमारी धरती के अनुकूल नहीं था । अंग्रेजी माध्यम से पढ़े और पढ़ रहे वैज्ञानिक प्रायः (कुछ अपवाद होंगे) व्यवहार में खेती से दूर हो जाते हैं और किसानों को उनके ज्ञान का अपेक्षित लाभ नहीं मिलता ।
इसलिए यह शीघ्र वांछित है कि कृषि की पढ़ाई उच्चतम स्तर तक हिन्दीभाषी क्षेत्र में और महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब आदि में हिन्दी माध्यम में हो ।
इस संबंध में राष्ट्रपति जी के लगभग 25 वर्ष पुराना आदेश देखने की कृपा करें । इस संबंध में यह निवेदन है कि अपने स्तर से हिन्दीभाषी राज्यों के कृषि मंत्रियों को राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों में उच्चतम स्तर तक हिन्दी में कृषि शिक्षा देने की प्रेरणा देने का कष्ट करें । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने की कृपा करें ।

सादर,
भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री