हाई कोर्ट में हिंदी, क्षेत्रीय भाषाओँ में काम कराने की मांग।

प्रतिष्ठा में,
श्री रवि शंकर प्रसाद जी,
माननीय विधि एवं न्याय मंत्री, भारत सरकार
शास्त्री भवन, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मार्ग, नई दिल्ली-110001

विषय :- हाई कोर्ट में हिंदी, क्षेत्रीय भाषाओँ में काम कराने की मांग।

महोदय,
निवेदन है कि संविधान के अनुच्छेद 348 में उच्च न्यायालयों में हिंदी और भारतीय भाषाओँ के प्रयोग का प्रावधान बिल्कुल स्पष्ट है । उसमें किसी उच्च न्यायालय अथवा उच्चतम न्यायालय से पूछताछ का कोई प्रावधान नहीं है । 21 मई, 1965 से शुरू हुई परामर्श की परंपरा न तो लोकहित में है और न ही भावी पीढ़ियों के हित में है । यह स्वाभाविक है कि जो न्यायाधीश और अधिवक्ता अंग्रेजी भाषा पर सवार होकर अन्य अनेक अंग्रेजी न जानने वालों अथवा कम अंग्रेजी जानने वालों को नचा सकते हैं, वे अंग्रेजी के साथ हिंदी का विकल्प सुलभ कराने में सहमत सरलता से नहीं होंगे । संविधान के प्रावधान को लागू हुए 67 वर्ष हो गए हैं और आगे जितना समय बीतेगा, अंग्रेजी की जकड़ मजबूत होती जाएगी । उस जकड़ को मजबूत करने में देश के हजारों कॉन्वेंट और पब्लिक स्कूल लगे हुए हैं, क्योंकि अंग्रेजी से उन्हें बेतुकी आमदनी हो रही है और राजनीतिबाजों की ढिलाई के कारण वे जनता को लूटने में सफल हो रहे हैं । इसलिए तत्परता से मंत्रालय की स्थायी समिति की संस्तुति पर कार्रवाई होनी चाहिए । यह भी उल्लेखनीय है कि संसदीय राजभाषा समिति की संस्तुतियों पर राष्ट्रपति जी ने आदेश दे रखे हैं, जो काफी पुराने हैं । इस संबंध में गृह मंत्रालय (राजभाषा विभाग) का दिनांक 13 जुलाई, 2005 का संकल्प संख्या 11011/5/2003-रा०भा० (अनु) देखने की कृपा करें और अविलंब उक्त संकल्प के बिंदु संख्या 16.8 पर विधायी विभाग से विर्मश करके तत्काल निर्णय लिया जाए । इसी विषय में गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग के दिनांक 24 नवंबर, 1998 के संकल्प संख्या 1/20012/4/92-रा० भा० (नी-1) को भी देखने की कृपा करें । उसकी संस्तुति संख्या 12 से 16 तक अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, जिन पर कार्रवाई प्रतीक्षा सूची में पड़ी हुई है । इससे पहले 27 अप्रैल, 1960 के राष्ट्रपति जी के आदेश में भी उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय में हिंदी के प्रयोग का कार्य आरंभ करने का आदेश है । विश्वास है कि शीघ्र जनहित में और देश की अधिकांश अंग्रेजी न जानने वाली जनता में स्वाधीनता की भावना की वृद्धि हेतु अनुकूल कार्रवाई की जाएगी । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री