स्टैंडर्ड जर्नल्स में अंग्रेजी में रिसर्च पेपर पब्लिश होने पर ही मिलेगा शिक्षकों को प्रमोशन।

प्रतिष्ठा में,
श्री प्रकाश जावडे़कर जी,
माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री, भारत सरकार
शास्त्री भवन, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद मार्ग, नई दिल्ली-110001

विषय :- स्टैंडर्ड जर्नल्स में अंग्रेजी में रिसर्च पेपर पब्लिश होने पर ही मिलेगा शिक्षकों को प्रमोशन।

महोदय,

ग्वालियर से प्रकाशित समाचार पत्र दैनिक भास्कर में छपे समाचार से यह निष्कर्ष निकल रहा है कि हिंदी माध्यम में काम करने वाले कॉलेज और विश्वविद्यालयों के आचार्यगण और शोधार्थियों को प्रोन्नति पाने में कठिनाई आएगी, क्योंकि स्थानीय शोध पत्रिकाओं में शोध पत्र प्रकाशित होने पर शोध पत्र के अंक नहीं मिलेंगे ।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 38,653 पत्रिकाओं/जर्नलों की सूची भेजी है, जिनमें संभवतः हिंदी में प्रकाशित स्वदेशी जर्नल नहीं हैं, क्योंकि आयोग ने उन्हें स्तरीय नहीं माना है ।
इस संदर्भ में निवेदन है कि –
1. वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् सहित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के तकनीकी/वैज्ञानिक जर्नल/पत्रिकाएँ हिंदी में प्रकाशित होती हैं
2. इस समाचार में हिंदी में प्रकाशित शोध पत्रों पर प्रोन्नति न होने की सूचना की तत्काल जाँच होनी आवश्यक है, क्योंकि यह भेदभावपूर्ण है और अपनी भाषाओँ के प्रति दुर्भावनापूर्ण भी है, अर्थात् उन्हें हीनता की श्रेणी में ला दिया गया है ।
3. गृह मंत्रालय, भारत सरकार के आदेश हैं कि हिंदी में प्रकाशित शोध पत्रों को प्रोन्नति के समय प्राप्तांकों में जोड़ा जाए और उन्हें कम वेटेज न दिया जाए, इसलिए भी उक्त समाचार से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्णय पर प्रश्न चिह्न लगता है ।

निवेदन है कि अविलंब कार्रवाई कराने की कृपा करें । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री