(1) संविधान के अनुच्छेद 348 (2) के अनुसार उच्च न्यायालयों में हिंदी तथा प्रादेशिक राजभाषाओं में कार्यवाही, निर्णय आदि संपादित करने का तथा विकल्प दिए जाने हेतु तथा (3) संविधान के अनुच्छेद 348 में संशोधन तथा कर उच्चतम न्यायालय में सभी कार्यवाहियाँ व निर्णय आदि में देश की तथा राजभाषा हिंदी में भी संपादित करने का विकल्प दिए जाने हेतु।

प्रतिष्ठा में,
श्री रवि शंकर प्रसाद जी,
माननीय विधि एवं न्याय मंत्री, भारत सरकार
शास्त्री भवन, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मार्ग, नई दिल्ली-110001

विषय :- (1) संविधान के अनुच्छेद 348
(2) के अनुसार उच्च न्यायालयों में हिंदी तथा प्रादेशिक राजभाषाओं में कार्यवाही, निर्णय आदि संपादित करने का तथा विकल्प दिए जाने हेतु तथा
(3) संविधान के अनुच्छेद 348 में संशोधन तथा कर उच्चतम न्यायालय में सभी कार्यवाहियाँ व
निर्णय आदि में देश की तथा राजभाषा हिंदी में भी संपादित करने का विकल्प दिए जाने हेतु।

महोदय,

निवेदन है कि दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा आदि हिंदी भाषी राज्यों में उच्च न्यायालयों में जहाँ हिंदी में निर्णय और आदेश देने की छूट नहीं है, वहाँ राज्य सरकारों के साथ तालमेल करके हिंदी को उच्च न्यायालय की वैकल्पिक भाषा बनाए जाने के संबंध में जनहित में शीघ्र कार्रवाई कराने की कृपा करें ।
राष्ट्रपति जी के 27 अप्रैल, 1960 के आदेश के आलोक में और अब लगभग 2 दशक पहले के राष्ट्रपति जी के आदेशों के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय में भी, यदि आवश्यक हो तो संविधान में संशोधन करके हिंदी को उच्चतम न्यायालय की वैकल्पिक भाषा बनाने के संबंध में शीघ्र कार्रवाई करने की कृपा करें । वैकल्पिक भाषा बनाने के संबंध में शीघ्र कार्रवाई करने की कृपा करें । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,
भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा) संपादक
(वीरेश त्यागी) प्रबंध संपादक