दिल्ली विश्वविद्यालय में बी.ए. की फिलोसोफी की वर्तमान पुस्तक के बजाय विपुल भारतीय वाङ्मय में से सामग्री रखने का निवेदन ।

प्रतिष्ठा में,
श्री प्रकाश जावडे़कर जी,
माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री, भारत सरकार
शास्त्री भवन, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद मार्ग, नई दिल्ली-110001

विषय :- दिल्ली विश्वविद्यालय में बी.ए. की फिलोसोफी की वर्तमान पुस्तक के बजाय विपुल भारतीय वाङ्मय में से सामग्री रखने का निवेदन ।

महोदय,
यह देखने में आया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के बी.ए. के फिलोसोफी के पाठ्यक्रम में पियरसन की पुस्तक रखी गई है, जो पाश्चात्य फिलोसोफी का प्रतिनिधित्व करती है । उसमें गहराई में जाने पर यह स्पष्ट पता चलता है कि उसमें लगभग 60 से 70 प्रतिशत सामग्री निरर्थक और कालबाह्य है । जिस देश में दर्शन शास्त्र के नाम पर 20-25 हजार पृष्ठों की अतुल्य सामग्री सुलभ हो, उसमें छात्रों और छात्राओं को दर्शन शास्त्र के नाम पर कुछ बेतुकी और जीवन दर्शन और आत्मिक दर्शन से प्रकाश वर्ष दूर की सामग्री पढ़ने के लिए परोसी जा रही हो तो यह भारतीय समाज और भारतवर्ष के लिए लज्जा की बात है ।
सुझाव है कि अष्टावक्र गीता और महाभारत में से दर्शन संबंधी सामग्री लेने के साथ-साथ छतरपुर में जैन महामुनि आचार्य महाप्रज्ञ जी (प्रज्ञा धाम जैन आश्रम छतरपुर नई दिल्ली) की लिखित पुस्तक दर्शन शास्त्र के पाठ्यक्रम में रखी जाए । बौद्ध दर्शन की जानकारी के लिए स्वर्गीय प्रो. जगन्नाथ उपाध्याय की पुस्तक बौद्ध मनीषा खण्ड-2 को, जिसके संपादक प्रो. राम शंकर त्रिपाठी हैं और जो केन्द्रीय बौद्ध विद्या संस्थान, चोगलमसर, लेह (लद्दाख) द्वारा प्रकाशित है, शामिल किया जाए।
इस ग्रंथ में जो अध्याय हैं, उनका वर्णन निम्नलिखित है –
1.    बहुजन कल्याण और महात्मा बुद्ध
2.    भगवान् बुद्ध की अनिवार्यता
3.    भगवान् बुद्ध का मानव धर्म
4.    भगवान् बुद्ध और आज का भारत
5.    बौद्ध दर्शन
6.    बौद्ध न्याय
7.    बौद्ध न्याय का विकास
8.    अपोहवाद
9.    बौद्ध दर्शन के जीवंत तत्त्व
10.     भारतीय चिंतन परम्परा में नए जीवन दर्शन की अपेक्षा
11.     भारतीय दर्शनों के नए वर्गीकरण की दिशा
12.    बौद्ध दर्शन का अन्य भारतीय दर्शनों पर प्रभाव आदि ।
अंग्रेजी में श्री अनवर शेख महोदय ने THE VEDIC CIVILISATION  नाम की पुस्तक लिखी है, जो PRINCIPALITY PUBLISHERS, P-O- BOX & 918, CARDIFF, UK  से प्रकाशित हुई है, उसे वैदिक दर्शन की पुस्तक के बतौर फिलोसोफी के पाठ्यक्रम में शामिल करना उपयोगी होगा, उसमें निम्नलिखित अध्याय हैं :-

1-     THE ARYAN CIVILISATION

2-         INGREDIENTS OF ARYAN CIVILISATION

3-         THE VEDA IN FOREIGN LANDS

4-         THE VEDIC ISLAM

5-         THE VEDIC SOCIETY  

इन पाठों में अत्यंत विस्तार से 257 पृष्ठों में विषय का गंभीर विवेचन स्वर्गीय अनवर शेख ने किया है । पुस्तक दिल्ली में उपलब्ध है ।
अतः निवेदन है कि इन पुस्तकों के कुछ अंश पाठ््यक्रम में शामिल कर लिए जाएँ । विश्वास है कि आप इस विषय पर शीघ्र गौर करने की कृपा करेंगे । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर

भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा) संपादक

(वीरेश त्यागी) प्रबंध संपादक