बच्चों पर अंग्रेजी लादना ऐसा ही है जैसे हिरणों पर घास लादना-डॉ. वेद प्रताप वैदिक ।

प्रतिष्ठा में,
श्री नरेन्द्र मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार।
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली-110011

विषय :- बच्चों पर अंग्रेजी लादना ऐसा ही है जैसे हिरणों पर घास लादना-डॉ. वेद प्रताप वैदिक ।

महोदय,

“अब हिरणों पर लदेगी घास” शीर्षक से प्रकाशित लेख में विद्वान लेखक डा. वेद प्रताप वैदिक ने उल्लेख किया है कि-
1.मोदी ने 12 सचिवों की एक समिति बनाई, यह तय करने के लिए कि देश के करोड़ों बच्चों की शिक्षा का माध्यम क्या हो और उन्हें कौन-सी भाषा पढाई जाए । इस निर्णय पर डॉ. वैदिक ने चेतावनी दी है कि हमारे सरकारी अफसर नरेंद्र मोदी सरकार का बेड़ा गर्क करने पर उतारू हैं, क्योंकि इन 12 रत्नों (सचिवों) के अनुसार छठी कक्षा से आगे तक सभी कक्षाओं में अंग्रेजी की पढाई अनिवार्य होनी चाहिए और देश के 6,612 खण्डों (ब्लॉकों) में सरकार को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की स्थापना करनी चाहिए ।
2.डॉ. वैदिक का यह तर्कयुक्त सुझाव है कि शिक्षा में भाषा नीति बनाने के लिए अफसरों के बजाय शिक्षाविदों और भाषाविदों की समिति बनाई जानी चाहिए ।
डॉ. वैदिक के ये विचार सुचिंतित हैं और दुनियाँ के प्रगत देशों के भाषायी अनुभवों के आधार पर हैं ।
डॉ. वैदिक का यह कथन सही है कि देश में हर साल करोड़ों बच्चे अंग्रेजी की जबर्दस्त पढ़ाई के कारण स्कूल छोड़ देते हैं और सबसे ज्यादा बच्चे अंग्रेजी में फेल होते हैं, अंग्रेजी रटने के कारण अन्य विषयों की उपेक्षा होती है और छात्रों की मौलिकता नष्ट होती है, वे नकलची बन जाते हैं, स्वभाषा और स्वदेश प्रेम में गिरावट आती है ।
हमारे देश के बिहार राज्य में मोटरसाइकिलों, साइकिलों और तिपहियों पर भैंसें ढोई गई होने की सूचनाएँ जगजाहिर हैं और ऐसे भ्रष्ट नेता बाहर घूम रहे हैं, इसी प्रकार का हिरणों पर घास लादने का उदाहरण डॉ. वैदिक ने बच्चों पर अंग्रेजी लादने के प्रसंग में प्रस्तुत किया है ।
प्रधानमंत्री जी और मानव संसाधन विकास मंत्रालय अंग्रेजी पढ़ाने की अनिवार्यता न करें, बल्कि इसे वैकल्पिक रखें । उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति जी का 4 नवंबर, 1991 के संकल्प संख्या 13015ध्1ध्91-रा० भा० (घ) के बिंदु संख्या 22 (ग) के अनुसार देश में सभी जगह विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में विभिन्न विषयों की पढाई हिन्दी में भी करने के लिए उपयुक्त व्यवस्था उपलब्ध कराने का आदेश है, जिसे अब 25 वर्ष हो गए हैं । यह स्वाभाविक है कि अंग्रेजी भाषा को अनिवार्यतः थोपने से राष्ट्रपति जी के और भारत सरकार के अब तक के संघ की राजभाषा हिन्दी को लागू करने के आदेश निरर्थक हो जाएँगे । यह भी कहना आवश्यक है कि इन आदेशों के पालन हेतु कोई उल्लेखनीय ठोस कार्रवाई नहीं हुई दिखाई पडती है । इन्हीं आदेशों के बिंदु 22 (छ) में भी हिन्दी माध्यम से कृषि, इंजीनियरी और आयुर्विज्ञान की पढ़ाई की व्यवस्था के आदेश दिए गए हैं । विश्वास है कि अविलंब वांछित आदेश देने की कृपा करेंगे ।

सादर,
भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा)
राष्ट्रीय महासचिव