बुर्के से आजादी का वक्त ।

प्रतिष्ठा में,
श्री राजनाथ सिंह जी,
माननीय गृह मंत्री, भारत सरकार
नॉर्थ ब्लॉक, नई दिल्ली-110001

विषय :- बुर्के से आजादी का वक्त ।

महोदय,

सुश्री नाइश हसन शोध छात्रा हैं और मुस्लिम महिला अधिकार कार्यकर्ता हैं । उन्होंने लेख में कुछ खुलासे किए हैं, जो निम्नलिखित हैं –
1. बाजार के जरिए यह प्रचार हुआ है कि बुर्का 3-4 साल की उम्र में भी जरूरी है ।
2. बुर्के का कुरान से कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि कुरान में औरत के पर्दे के लिए बुर्का शब्द का प्रयोग नहीं हुआ ।
3. बुर्का शब्द के मायने हैं, सर्दियों से बचने के लिए कपड़े का टुकड़ा ।
4. लिसान-अल-अरब शब्दकोश में बुर्का का अर्थ जानवरों को सर्दियों में ढकने के लिए प्रयोग किया जाने वाला कपड़ा और दूसरा अर्थ एक कवर जिसका प्रयोग गाँव की औरतें करती हैं ।
5. आज हिन्दुस्थान में हिजाब शब्द का प्रयोग बुर्के के बराबर होने लगा है, जबकि हिजाब का अर्थ कर्टेन यानि खिडकियों व दरवाजों पर लगाया जाने वाला पर्दा है ।
6. हिन्दुस्थान में पिछले 10 सालों से बुर्का पहनने का चलन बढ़ा है, यह यहाँ के मुसलमानों पर सऊदी अरब और वहाबियत का बढ़ता प्रभाव ही है ।

उपर्युक्त खुलासों से ऐसा लगता है कि मुसलमान पुरुष स्त्रियों को खिड़की और दरवाजों से कुछ अधिक नहीं समझते । सरकार को यह भी पता होगा कि अनेक देशों में बुर्के पर पाबंदी लगी है । मोरक्को में रातों-रात प्रतिबन्ध लगा दिया गया । प्रश्न यह उठता उठता है कि भारत सरकार में कब इतना दम पैदा होगा कि मुसलमानों के घरों में बंदी
माताओं और बहनों को बुर्के और हिजाब जैसे अत्याचारों से मुक्ति दिला सके । यह पुष्ट हो गया है कि भारत सरकार इन मुद्दों पर सख्त कदम उठाएगी तो भाजपा को भावी चुनावों में मुस्लिम माताओं और बहनों के वोट मिलेंगे ।
सरकार को दृढ़ता पूर्वक इन बुराइयों से मुस्लिम माताओं और बहनों को छुटकारा दिलाना चाहिए । इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,
भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष
(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव
(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री