उच्चतम न्यायालय द्वारा राममंदिर विवाद में समझौते के प्रस्ताव का स्वागत, मुख्य न्यायाधीश की मध्य स्थता में हो वार्ता-हिन्दू महासभा

उच्चतम न्यायालय द्वारा राममंदिर विवाद में समझौते के प्रस्ताव का स्वागत, मुख्य न्यायाधीश की मध्य स्थता में हो वार्ता-हिन्दू महासभा

अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्रप्रकाश कौशिक, राष्ट्रीय महामंत्री मुन्ना कुमार शर्मा, राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री वीरेश त्यागी एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता पं0 प्रमोद जोशी ने उच्चतम न्यायालय द्वारा राम मंदिर विवाद में मध्यस्थता के प्रस्ताव का स्वागत किया है। उन्होनें कहा है किः-

1. 23 मार्च 1528 से पूर्व से मंदिर अधिपती श्री पंच रामानंदिय निर्माही आखाड़ा, रामघाट, अयोध्या 1885, से सिविल सूट लड़ रहे हैं।
2. 23/24 दिसंबर 1949, अयोध्या आंदोलन में अखिल भारत हिन्दू महासभा से जुड़े श्री पंच रामानंदिय निर्माही आखाड़े के छह महंतों पर श्री राम जन्मभूमि मंदिर में मूर्तियां रखने का अभियोग चला और वह निर्दोष छूटे थे।
3. 1962/63 सुन्नी वक्फ बोर्ड ने हिन्दू महासभा पर मूर्तियां रखने का आरोप लगाकर निकालने की याचिका लगाई थी तब ब्रहमलीन मंहत परमंहस रामचंद्रदास जी महाराज ने श्री पंच रामानंदिय निर्मोंही आखाड़े के पक्ष में कोर्ट मे साक्ष्य दी थी।
4. श्री पंच रामानंदिय निर्माही आखाड़ा के राष्ट्रीय उपसरंपच महंत श्री दिनेंद्रदास महाराज ने होटल विश्वनाथ लखनऊ में हाशीम अंसारी के साथ समझौता किया था तब भाजपाईयों ने विरोध करते हुए असमय चौरासी कोसी यात्रा सपा से मिलकर निकालने का प्रयास किया था। उसे अखिल भारत हिन्दू महासभा ने विरोध कर रूकवाई थी।
5. मा. सर्वोच्च न्यायालय ने हिन्दू महासभा, निर्माही आखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड को समझौते का प्रस्ताव दिया है। इसका हिन्दू महासभा स्वागत करती है, परंतु मा. मुख्य न्यायाधीश की मध्यस्थता महत्वपूर्ण होगी। मध्यस्थता में समझौता वार्ता हो। यदि सभी वादी सहमत न हों तो उच्चतम न्यायालय प्रतिदिन सुनवाई कर शीघ्र निर्णय दें या संसद द्वारा विशेष कानून बनाकर मंदिर का निर्माण तुरन्त हो।

वीरेश त्यागी
राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री