हिंदी पर अकारण आक्षेप ।

प्रतिष्ठा में,
श्री राजनाथ सिंह जी,
माननीय गृह मंत्री, भारत सरकार
नॉर्थ ब्लॉक, नई दिल्ली-110001

विषय :- हिंदी पर अकारण आक्षेप ।

महोदय,
बंगलुरू में मेट्रो रेल के स्टेशनों आदि पर नाम कन्नड़, हिंदी और अंग्रेजी में लिखे होने पर कुछ नासमझ और अति उत्साही अंग्रेजी प्रेमियों ने कन्नड़ प्रेमी होने का दिखावा करते हुए हिंदी नामों को मिटाने की कोशिश की है । हिंदी में कुछ भी ऐसा नहीं, जो कन्नड़ के विरुद्ध हो और हिंदी का स्वरूप राष्ट्रीय है । वस्तुतः हिंदी विरोधी आन्दोलन कुछ थोड़े से अंग्रेजी प्रेमियों की ईर्ष्या-द्वेष का परिणाम है ।
भारत सरकार, गृह मंत्रालय के स्थायी आदेशों के अनुसार सब राज्यों में केन्द्रीय सरकारी कार्यालयों में नामपट्ट और सूचनापट्ट तीन भाषाओँ में लिखे जाना आवश्यक है, जिसके अनुसार सम्बंधित राज्य की राजभाषा सबसे प्रथम होती है और हिंदी द्वितीय स्थान पर होती है । ऐसी स्थिति में किसी भी कन्नड़ अथवा अन्य भारतीय भाषा के पक्षधर को हिंदी के प्रति आक्रोश नहीं निकालना चाहिए ।
वस्तुतः यह कांग्रेस सरकार की उस कुनीति का एक अंग है, जिसमें कर्नाटक की सरकार एक अलग ध्वज अपनाना चाहती है, उसी अलगाववादी सोच के तहत हिंदी का विरोध भी किया जा रहा है ।
वस्तुतः यह संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है, क्योंकि हिंदी संघ की राजभाषा है और अनुच्छेद 351 की भावना की पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और देश की जनता का यह कर्तव्य है कि सब हिंदी का विकास करें और प्रसार बढ़ाएँ ।
इस प्रसंग में सुझाव है कि सम्बन्धित कन्नड़ के छद्म प्रेमियों को आमंत्रित करके उन्हें समझाने का प्रयत्न किया जाए ।
हिंदी की लिपि, शब्द भंडार और मिजाज तक अखिल भारतीय हैं और हिंदी पूरे देश की सांझी भाषा है ।
इस सम्बंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,

भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव

(वीरेश त्यागी)  राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री