तलाक-ए-एहसन एवं तलाक-ए-हसन को प्रतिबंधित करने की मांग।

प्रतिष्ठा में,
श्री नरेन्द्र मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली-110011

विषय :- तलाक-ए-एहसन एवं तलाक-ए-हसन को प्रतिबंधित करने की मांग।

महोदय,
बड़ी चिंता की बात है कि सन् 1937 में बने अंग्रेजों के तीन तलाक के कानून को लगभग 80 वर्ष बाद जन्नत में भेजा गया है, किन्तु ऐसा लगता है कि केवल पूँछ ही जन्नत में गई है और भेड़िया अभी भी मुस्लिम माताओं और बहनों को नोचने के लिए हिन्दुस्थान में विराजमान है तभी तो तलाक के दो क्रूर तरीके यानी तलाक ए एहसन और तलाक ए हसन लागू हैं । भारी मशक्कत के पश्चात् उच्चतम न्यायालय ने तीन तलाक के वज्रपात को निरस्त किया है, किन्तु दो यमदूत अभी भी मुस्लिम माताओं और बहनों को पीड़ा देने के लिए रह गए हैं । जैसे आपने तीन तलाक को जन्नत में भेजा है, उसी प्रकार इन दोनों को भी शीघ्र जन्नत में भेजने का कष्ट करें ।
सादर, भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष

(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव

(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री