रोहिंग्या मुसलमानों की घुसपैठ को रोकने व उसे देश से निकालने की मांग।

प्रतिष्ठा में,
श्री नरेन्द्र मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार।
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली-110011

विषय :- रोहिंग्या मुसलमानों की घुसपैठ को रोकने व उसे देश से निकालने की मांग।

महोदय,
भारत में मानवाधिकार के नाम पर रोहिंग्या मुसलमानों को बसाने का प्रयास किया जा रहा है। आतंकी याकूब मेमन के अधिवक्ता रहें प्रशांत भूषण इन रोहिंग्या मुस्लिम घुसपैठियों की वकालत करके इनको यहां मानवता के नाम पर बसाना चाहते हैं।
परंतु क्या यह कोई सुनिश्चित कर सकता है कि रोहिंग्या मुसलमान भारत में घुसपैठ करके बंग्लादेशी घुसपैठियों के समान जिहाद के अंतर्गत आतंक व अपराध को बढ़ावा नही देंगें ? जबकि हम पहले ही करोड़ों बंग्लादेशी घुसपैठियों के आतंक को झेल रहे हैं जिसके कारण हमारी न्यायायिक व्यवस्था बार बार सरकार से इन घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने के लिये भी परामर्श देती आ रही है। फिर भी हम इन रोहिंग्या घुसपैठियों को स्वीकार करके मानवता के नाम पर आतंक व अपराध की समस्याओं को ही बढ़ावा दें तो यह भूल नहीं आत्मघाती होगा।
जरा सोचें ये मुस्लिम म्यंमार से क्यों भाग रहें है ? इन्होने वहां के बौद्ध व अन्य धर्म के नागरिकों को अपनी जिहादी सोच के कारण वर्षो से आतंकित कर रखा है। वहां के एक बौद्ध भिक्षु विराथू ने जब इनकी मानसिकता को समझा तो उन्होने शांतिप्रिय होते हुए भी अपने राष्ट्र व नागरिकों के अस्तित्व की रक्षा के लिये इन आतंकियों के विरुद्ध संघर्ष करने के लिये सभी को प्रेरित किया।अभी भी वहां ये मुस्लिम आतंकी रक्षाबलों के ठिकानों पर व सामान्य क्षेत्रों में भी आक्रमण करने से पीछे नही हट रहें हैं।अनेक आतंकी संगठन वहां के स्थानीय मुसलमानों का सहयोग करके जिहाद के लिये सक्रिय है।
ऐसी जिहादी मानसिकता वाले रोहिंग्या मुसलमानों को हम अपने यहां शरण दें तो हम भविष्य में इनके द्वारा और अधिक जिहादी संकट को कैसे रोक पायेंगे ? जबकि हम अपने ही लाखों कश्मीरी हिंदुओं को कश्मीर में उनके ही नगरों में उन्हीं की संपत्तियों में पुनः स्थापित करने में जिहादियों के कारण ही असमर्थ हो रहें हैं।
क्या मानवतावादियों को उदार व सहिष्णु हिंदुओं की पीड़ा द्रवित नहीं करती ? क्या सभी मानवतावादियों को मानवता का सर्वनाश करने वाले इन आतंकियों के ही मानवाधिकार की चिंता होती है ?
अतः आपसे मांग है कि अवैध रुप से रह रहें रोहिंग्या घुसपैठियों को देश से बाहर निकाला जाये और भविष्य में म्यंमार से भाग कर आने वालों का प्रवेश वर्जित किया जाये।
सादर, भवदीय

(चन्द्रप्रकाश कौशिक) राष्ट्रीय अध्यक्ष

(मुन्ना कुमार शर्मा) राष्ट्रीय महासचिव

(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री