धर्म को मजहब न बनाएँ, धर्मनिरपेक्षता, आजादी के बाद का सबसे बड़ा झूठ ।

प्रतिष्ठा में,

श्री रवि शंकर प्रसाद जी,
माननीय विधि एवं न्याय मंत्री, भारत सरकार
शास्त्री भवन, नई दिल्ली-110001

विषय :- 1. धर्म को मजहब न बनाएँ ।
2. धर्मनिरपेक्षता, आजादी के बाद का सबसे बड़ा झूठ ।

महोदय,

‘धर्म को मजहब न बनाएं‘ शीर्षक वाले लेख के लेखक श्री शंकर शरण ने बहुत सही लिखा है कि-

धर्म आचरण से जुड़ा है जबकि रिलीजन विश्वास से । उन्होंने आगे यह भी लिखा है कि मुसलमानों और ईसाइयों में फेथ ही रिलीजन हैं । अंग्रेजी शिक्षा और विकृत सेक्युलरिज्म के सम्मिलित दुष्प्रभाव से हम धर्म से दूर हो रहे हैं ।
अतः निवेदन है कि जिस प्रकार संविधान में सेक्युलर शब्द के लिए हिंदी में पंथनिरपेक्ष लिखा गया है उसके लिए सब सरकारी विभागों आदि को सलाह दे दी जाए कि बोलने और लिखने में सदा पंथनिरपेक्ष शब्द का प्रयोग करें और कहीं भी धर्मनिरपेक्ष का प्रयोग न करें ।
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने भी जोर देकर कहा है कि शासन की व्यवस्था धर्मनिरपेक्ष नहीं बल्कि पंथनिरपेक्ष हो सकती है । उन्होंने यह भी कहा है कि-
सनातन धर्म ही वास्तव में धर्म है, धर्म को मत-मजहब से जोड़ने पर भ्रम होगा । इस कथन के पश्चात् भी यह आवश्यक है कि विधि मंत्रालय तत्काल सब सरकारी विभागों को सलाह (ंकअपेवतल) दे कि लिखने और बोलने में धर्म, पंथ, मजहब और रिलीजन को अलग-अलग रखें और मजहब तथा रिलीजन को धर्म न बोलें/लिखें ।
इस सम्बंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भिजवाने का कष्ट करें ।

सादर,
भवदीय

(मुन्ना कुमार शर्मा)  राष्ट्रीय महासचिव

(वीरेश त्यागी) राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री